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नोएडा जाने से डर लगता है?

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नोएडा जाने से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कतराते हैं। वहां के बारे में माना जाता है कि जो वहां का दौरा करता है, उसकी कुर्सी चली जाती है। यह एक तरह का मिथक या अंधविश्वास बनता जा रहा है।

यदि योजनाओं का शिलान्यास करना हो तो वे दूर से बैठकर नोएडा के लिए शिलान्यास या उद्घाटन करते हैं।

31 दिसम्बर को पीएम मोदी नोएडा आ रहे हैं। वहां वे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की नींव रखेंगे। मगर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस दौरान उनके साथ नहीं होंगे। उन्हें शायद डर है कि यदि वे वहां पहुंच गये तो अगली बार उनसे सत्ता छिन जायेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पहले भी कई मौकों पर नोएडा न जाने का कारण पूछा गया तो वे मुस्कराते हुए चले गये। कहने को उनके पास उसका जबाव नहीं था या वे उसपर बात नहीं करना चाहते थे।

मुलायम सिंह यादव भी नोएडा गये और बाद में सपा हार गयी।

वीर बहादुर सिंह से लेकर मायावती तक को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

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मायावती ने 2011 में नोएडा का दौरा किया। उसके बाद 2012 के विधासभा चुनाव में उनकी कुर्सी छिन गयी। पार्टी सत्ता से साफ हो गयी।

एनडी तिवारी, राम प्रकाश गुप्ता, कल्याण सिंह जैसे वे नाम हैं जो वहां जाने के बाद फिर सीएम नहीं बन पाये। यहां तक की राजनाथ सिंह ने उस समय मुख्यमंत्री बनने के बाद नोएडा फ्लाइओवर का उद्घाटन दिल्ली से किया था।

दादरी कांड के समय अखिलेश यादव ने कहा था कि वे जल्द अंधविश्वास को तोड़ेंगे।

लेकिन अंधविश्वास तो बना हुआ है।

-गजरौला टाइम्स डॉट कॉम.

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