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पालिका प्रशासन और पुलिस की अवैध कमाई का जरिया है अतिक्रमण

दोनों ताकतों के आगे लाचार हैं अतिक्रमण कानून और जनता.

मार्च के अंतिम सप्ताह में नगर पालिका की ओर से चलाया अतिक्रमण अभियान औचित्यहीन हो गया है। नगर पालिका प्रशासन ने कुछ स्थानों से सड़क को ठेलों, खोखों तथा वाहनों के अतिक्रमण से कुछ मुक्ति दिलाने का उपक्रम किया। इससे हसनपुर रोड(अल्लीपुर चौपला) तथा थाना चौक पर थोड़ा प्रभाव नजर आया था। धीरे-धीरे फिर से अतिक्रमण शुरु हो गया है और लोग फिर से सड़क घेरकर कारोबारों में जुट गये हैं। इससे अतिक्रमण हटाओ अभियान की हवा निकल गयी है। हकीकत में कानून व्यवस्था का दायित्व वहन करने वाली पुलिस की कृपा से अतिक्रमण बढ़ रहा है। दूसरी ओर पालिका प्रशासन तो सड़क अतिक्रमण का प्रतिवर्ष ठेका देता है। यहां चौदह वर्षों से अपने पद पर डटा इ.ओ. कामिल पाशा वैधतापूर्ण सड़क अतिक्रमण बढ़ाने का ठेका देता रहा है।

अवैध कमाई का जरिया है अतिक्रमण

उल्लेखनीय है कि पालिका परिषद में कहीं भी वाहन पार्किंग की जगह नहीं है। फिर भी उसकी ओर से पार्किंग शुल्क वसूलने का ठेका दिया जाता है। पिछली बार यह 18 लाख तथा इस बार 24 लाख रुपये का बताया जा रहा है। जाहिर है इससे कहीं अधिक धन ठेकेदार वाहन चालकों से वसूलता है। सड़कों के किनारे अवैध रुप से लोग अपने वाहन खड़े करते हैं- सड़कें वाहनों के चलने के लिए हैं। उनपर दिनभर वाहन खड़े करने के लिए हैं। ठेके के कारण पालिका परिषद उन्हें वहां से हटाने के बजाय, यदि कोई हटवाना चाहे तो उसी के विरोध में खड़ा होता है। अल्लीपुर चौपला जहां पुलिस चौकी हैं तथा थाना चौराहा जहां पुलिस हर समय मौजूद रहती है। सड़कों की दोनों साइडों पर कारों, यात्री वाहनों और घोड़े तांगों का जमावड़ा रहता है। इसी से जाम लगते हैं। यातायात अवरुद्ध होता है और दुघर्टनायें होती हैं। पुलिस तथा पालिका परिषद की कमायी का अवैध साधन बना अतिक्रमण ऐसे में कैसे हट सकता है?

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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