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स्वच्छ भारत और नमामि गंगे योजना में चयनित गांवों का बुरा हाल

इन सभी गांवों में 30 अप्रैल तक शौचालय बनाकर गांवों को खुले में शौच मुक्ति दिलानी थी.

विकास खंड के गंगातटवर्ती जिन गांवों को शौच मुक्त कराना था वहां तय समय सीमा बीतने पर भी लोगों के शौचालय नहीं बन पाये। नमामि गंगा योजना के तहत देशभर में गंगा तटवर्ती सभी गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाना था। इसके तहत यहां के 13 गांवों का चयन कर कुल 1734 घरों में शौचालय बनने थे जिनके लिए शासन से प्रति शौचालय 12 हजार रुपये मंजूर किये गये थे। इन सभी गांवों में 30 अप्रैल तक शौचालय बनाकर गांवों को खुले में शौच मुक्ति दिलानी थी।

स्वच्छ भारत और नमामि गंगे योजना

तय समय सीमा पर शौचालय न बनने से जिले भर के अफसर परेशान हैं जबकि हाल ही में सीडीओ अभिषेक सिंह, डीपीआरओ जाहिद हुसैन और एडीओ पंचायत राजकुमार ने इन गांवों का दौरा कर शौचालय निर्माण जल्दी से जल्दी पूरा कराने के लिए विचार विमर्श किया था।

ग्राम मौहम्मदाबाद में इन अधिकारियों ने पहुंच कर ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी को शौचालय शीघ्र बनवाने का आदेश दिया। शौचालयों की गुणवत्ता के लिए भी चेताया।

नमामि गंगे योजना निगल गयी तरबूज
प्रतिवर्ष गर्मी के मौसम में तरबूजों से भरा रहने वाले गजरौला के बाजार में इस बार तरबूज के दर्शनों को लोग तरस गये हैं। सरकार की नमामि गंगे योजना के कारण ऐसा हुआ है।

 गंगा तट के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ी पट्टी में तरबूजों की खेती की जाती रही है। इसके सहारे अकेले गजरौला ब्लॉक के ही हजारों किसान अपना तथा अपने परिवार का गुजारा करते आ रहे थे। नमामि गंगे योजना के कारण गंगा के दोनों ओर काफी दूर तक तरबूज आदि की खेती पर पाबंदी लगने से तरबूज उगाने और खाने वालों के सामने संकट खड़ा हो गया है। 

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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