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राहत के बजाय किसानों की बांह मरोड़ने की तैयारी

किसानों से अब 7.5 के बजाय 10 के.वी. का बिजली बिल वसूलने का इरादा हो गया है.

उत्तर प्रदेश के किसान भाजपा सरकार से किसी राहत की उम्मीद छोड़ दें और आने वाले दिनों में नयी परेशानियां उठाने को तैयार हो जायें। केन्द्र सरकार ने तो कर्ज माफी का दायित्व अपने सिर से उतारकर राज्य सरकार पर थोप दिया जबकि राज्य सरकार पहले ही विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र से पैसा मांग रही है। किसी भी किसान का अभी तक कोई कर्ज माफ नहीं हुआ और न ही इस दिशा में कुछ होता दिख रहा है। कर्ज माफी की मांग को लेकर कई जगह किसान संगठनों के धरने और प्रदर्शन शुरु हो गये हैं।

राहत के बजाय किसानों की बांह मरोड़ने की तैयारी

राहत के बजाय किसानों की बांह मरोड़ने की तैयारी शुरु हो गयी है। किसानों से अब 7.5 के बजाय दस के.वी. का बिजली बिल वसूलने का इरादा हो गया है। अखबारों में योगी सरकार बनने के एक माह में कई बार आधिकारिक वक्तव्य जारी कर दिये गये हैं तथा बिजली विभाग किसानों को अब 7.5 के.वी. का कनेक्शन न देकर 10 के.वी. के कनेक्शन की मंजूरी दे रहा है। यानि जो किसान 15000 वार्षिक बिजली बिल अदा कर रहा था उसे अब सीधे बीस हजार देने होंगे। किसानों के साथ यह बड़ा अन्याय है बल्कि इससे उन छोटे किसानों की मुसीबत बढ़ जायेगी जिन्होंने एक-डेढ़ एकड़ भूमि पर बिजली नलकूप लगा रखा है। बड़े किसानों पर इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला। फिर भी कम या अधिक, बिजली से सिंचाई करने वाले सभी किसानों पर बोझ तो बढ़ेगा ही।

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इससे यदि मीटर व्यवस्था लागू की जाती तो उससे बिजली विभाग लाभ में रहता तथा छोटे किसानों को राहत महसूस होती। अब पांच बीघा पर नलकूप लगाने वाला और पचास-साठ बीघा पर नलकूप लगाने वाले बराबर बिल अदा कर रहे हैं। छोटे किसानों के साथ यह सरासर अन्याय है तथा न्यूनतम 10 के.वी. की वसूली तो और भी बड़ा अन्याय है।

जीएसटी कानून का मसौदा तैयार करने वाले गुजराती अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वे जीएसटी में ऐसी प्रणाली ला रहे हैं जिससे कृषि उत्पादों को कर के दायरे में लाया जायेगा। योजना आयोग को बिगाड़कर नीति आयोग घड़ने वाले तीन साल से इसी मंथन में लगे हैं कि परोक्ष रुप से सारे करों का बोझ वहन करने वाले आम आदमी पर कर का सीधा भार कैसे डाला जाये। इसी मंथन में उसे किसान और छोटे दुकानदार सबसे अच्छा शिकार नजर आ रहे हैं।

-जी.एस. चाहल.


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