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'प्रदूषण मुक्त, रोजगार परक उद्योग लगाये जायें'

छात्रों ने सलाह दी है कि उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रित प्रणाली अमल में लाने के सख्त निर्देश दिये जायें.

स्थानीय उद्योगों द्वारा फैलाये जा रहे प्रदूषण के कारण उद्योगों के खिलाफ एनजीटी द्वारा की जा रही कार्रवाई का स्वागत करते हुए छात्र संघर्ष समिति ने उद्योगों को बंद कराये जाने के बजाय उनमें प्रदूषण रोधी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की सलाह दी है।

संदीप भड़ाना एवं नैपाल सिंह.
 नैपाल सिंह एवं संदीप भड़ाना.

छात्रों ने प्रेस के नाम जारी बयान में कहा है कि स्थिति बेहद दुविधापूर्ण है। एक ओर जहां औद्योगीकरण से फैल रहा प्रदूषण जनजीवन और प्रकृति के लिए खतरनाक होता जा रहा है, वहीं इसके विपरीत उद्योगों के बंद होने से रोजगार सिमट रहे हैं जिससे युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारपूर्ण होता जा रहा है।

नैपाल सिंह एवं संदीप भड़ाना का कहना है कि देश में औद्योगीकरण पर जोर दिया जा रहा है जो विकास और रोजगार के लिए जरुरी है लेकिन प्रदूषण पर नियंत्रण भी उतना ही जरुरी है। ऐसे में चालू उद्योग धंधों को बंद करने के बजाय उन्हें नयी प्रदूषण तकनीक से लैस किया जाये। देश के लगभग सभी उद्योग प्रदूषण वाहक हैं। यह अलग बात है कि कहीं यह शिकायत कम है, तो कहीं अधिक।

छात्रों ने सलाह दी है कि उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रित प्रणाली अमल में लाने के सख्त निर्देश दिये जायें तथा इन्हें बंद कराने के बजाय गजरौला में और भी नये उद्योग धंधे स्थापित किये जायें। उन्होंने यह शर्त भी लगायी है कि स्थानीय युवाओं को सेवाओं में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। बयान जारी करने वालों में संदीप भड़ाना, नैपाल सिंह, अजय शर्मा, देवेन्द्र विधूड़ी, प्रशांत चौधरी, आदि मौजूद रहे।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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