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योगी के लिए चुनौती सूबे में अपराध और अपराधी

पहले सपा के सुशासन में अब भाजपा के सुराज में सूबे की जनता को कोई राहत नहीं मिल रही.

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में सुधार करना उतना आसान नहीं है जितना कार्यभार ग्रहण करते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा था। यहां अपराधों पर नियंत्रण पाना भी एक जटिल कार्य है। यही कारण है कि नयी सरकार के सत्ता में आने के बावजूद अपराध कम होने के बजाय बढ़े हैं। दरअसल दशकों से यहां सत्तासीन सरकारों ने कानून व्यवस्था दुरुस्त करने और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए जो ढंग अपनाये हैं वे पूरी तरह अपर्याप्त तथा बीमारी को समझने के बजाय उसे स्वेच्छा से दबाने का प्रयास किया है। जिससे रोग समाप्त होने के बजाय रह-रहकर अपना प्रभाव दिखाता रहा है।

yogi adityanath chief minister up

मसलन हम इसके लिए केवल एक छोटे से जनपद अमरोहा को ही लेते हैं। यहां सपा शासन में चार विधानसभाओं में आधा दर्जन और कभी-कभी इनसे भी अधिक कैबिनेट और दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री रहे। बसपा सरकार से रुष्ट तब सूबे के लोगों ने सपा को मौका दिया तो वही ऐलान हुआ कानून व्यवस्था दुरुस्त होगी और अपराधमुक्त समाज बनेगा। लोग जानते हैं कि किस तरह पांच वर्षों तक सत्ताधीशों ने प्रशासनिक अमले को बंधक बनाने जैसी हालत में अपनी अंगुलियों पर नचाया। परिणाम पशु तस्करी, हत्या, लूट, चोरी आदि अपराध जारी रहे बल्कि पहले से अधिक हो गये।

ग्रामांचलों में लोगों में आपसी विवाद घटाने के बजाय बढ़ाया गया। जब हालात अधिक बिगड़ते तो पुलिस की ताकत से उन्हें दबाया गया। जिले के एक दर्जन से ज्यादा गांवों में पुलिस हर समय तैनात करनी पड़ी। यानि समस्या को ईमानदारी से सुलझाने के बजाय डंडे के बल पर उसे दबाया गया। आग बुझाने के बजाय उसे ऊपर से शांत कर अंदर ही अंदर सुलगने दिया गया। तत्कालीन सत्ताधारी नेता अपनों के बचाव में पीड़ितों को और उत्पीड़ित करते रहे।

फिर सत्ता को जनता ने पलटा तो वह दबी आग जगह-जगह फिर भड़कने लगी। हत्यायें, चोरी, डकैतियां और बलात्कार की घटनायें फिर से तेजी पकड़ने लगीं। पहले सपा के सुशासन में अब भाजपा के सुराज में आम आदमी और सूबे की जनता को कोई राहत नहीं मिलती दिख रही। सत्ता के शिखर पर केवल चेहरे बदलते हैं, कार्यशैली लगभग एक जैसी ही रहती है।

-टाइम्स न्यूज़.


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