Header Ads

बोरिंगों की छूट में लूट का खुलासा : सिंचाई विभाग व ब्लॉक कर्मियों में खलबली

किसानों का आरोप है कि 200 फीट बोरिंग के स्थान पर केवल 150 फीट बोरिंग किया जा रहा है.

लघु सिंचाई विभाग की ओर से किसानों के खेतों में छूट पर किये जा रहे बोरिंगों में भारी घोटाला चल रहा है। इस घोटाले में विकास खंड कार्यालय और लघु सिंचाई विभाग की मिलीभगत होने का पता चला है। शिकायत जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल के दफ्तर तक पहुंच गयी है। योजना में शामिल कई किसानों ने काम बीच में ही रोक दिया है। दो सौ फीट की जगह डेढ़ सौ फीट बोरिंग किया जा रहा है। उसमें डाली जाने वाली 100 कुंटल रोड़ी की जगह 50 कुंटल ही रोड़ी डाली जा रही है।

boring_well_gangeshwari

किसानों का कहना है कि अमरोहा में सिंचाई विभाग का गोदाम है जहां से बोरिंग का सामान खेतों तक लाया जाता है। यह दायित्व भी संबंधित विभाग का है। उसे बोरिंग साफ पानी निकलता हुआ मिलना चाहिए। जिसके लिए आधा धन किसान और आधा सरकार देती है।

किया यह जा रहा है कि सामान गोदाम से खेतों तक किसानों को ले जाना पड़ रहा है। बोरिंग के लिए गड्ढा भी किसान को खोदने को कहा जा रहा है। जबकि इन दोनों कार्यों का धन भी योजना में शामिल है। गड्ढा खोदने के लिए सरकार से विभाग को तीन हजार रुपये दिये जाते हैं। कुल खर्च लगभग 1 लाख 15 हजार रुपये आता है जिसका पचास फीसदी सरकार देती है।

किसानों का आरोप है कि दो सौ फीट बोरिंग के स्थान पर केवल 150 फीट बोरिंग किया जा रहा है। इसमें ऊपर का पाइप 8 इंच तथा अंदर 6 इंच चौड़ी जाली का पाइप डाला जाता है। अकेले पाइप में ही भारी भरकम घोटाला किया जा रहा है। इसमें सौ कुन्टल रोड़ी डाली जानी चाहिए लेकिन केवल पचास कुन्टल रोड़ी में ही काम चल जाता है। नीचे 50 फीट पाइप कम होने से यह बचत की जाती है।

इस प्रकार पचास फीट पाइप, 50 कुन्टल रोड़ी, गड्ढा खुदाई और अमरोहा से गंगेश्वरी तक का ढुलाई खर्चा, इन सब को मिलाकर कम से कम प्रति बोरिंग तीस हजार रुपयों का घोटाला किया जा रहा है। इसी के साथ बोरिंग होने के बाद उसका पानी भी साफ नहीं कराया जाता। यह खर्च भी बच जाता है।

किसानों को इस घोटालेबाजी का जैसे ही पता लगा वे लामबंद हो गये। उन्होंने काम बीच में ही रुकवा दिया। कई किसानों ने डीएम चहल के कार्यालय जाकर शिकायत भी कर दी। जिसके बाद से एडीओ(एम.आइ.) और लघु सिंचाई के जे.इ. भागे फिर रहे हैं तथा किसानों को मनाने का प्रयास कर रहे हैं।

bore_well

बोरिंग, मोटर तथा गूल तक पर अनुदान का प्राविधान है.
सभी जगह गंगेश्वरी जैसी स्थिति, जांच की दरकार.
लघु सिंचाई योजना के तहत बोरिंग में अधिकतम 75 हजार रुपये अनुदान दिया जाता है जो कुल लागत का 50 फीसदी होता है। इसी के साथ तत्काल मोटर लगवाने वाले किसानों को उसपर 20 हजार अनुदान दिया जाता है। जो किसान पक्की गूल (जिसे गांव की भाषा में बराह कहते हैं)। साठ मीटर लंबी गूल के लिए दस हजार अनुदान प्रदान किया जाता है। पूरी जानकारी न होने पर कई किसानों को विभागीय कर्मी ठगते रहते हैं। गंगेश्वरी में भी यही रवैया अपनाया जा रहा है लेकिन कई चालक किसान समझ गये तथा उन्होंने विरोध शुरु कर दिया। इस तरह की योजना दूसरी जगह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही होगी। इसे पूरे सूबे में जांच के घेरे में लाकर प्रदेश सरकार को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें लघु सिंचाई तथा विकास खंड के अधिकारी पूरी तरह संलग्न होते हैं।

पहले ब्लॉक और फिर लघु सिंचाई विभाग में लूटा जाता है किसान.
लघु सिंचाई योजना में बोरिंग आदि पर छूट के लिए किसानों का चयन करने में ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव से लेकर एडीओ(एम.आइ.) बीडीओ से स्वीकृति लेनी होती है। किसानों का कहना है कि ये लोग छूट दिलाने के नाम पर अपना हिस्सा पहले ही ले लेते हैं। एक एडीओ ने बताया कि ब्लॉक प्रमुख भी हिस्सा मांगते हैं और देना पड़ता है। इसी सिलिसिले में मंडी धनौरा ब्लॉक में गत माह ब्लॉक प्रमुख और ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों में विवाद भी हुआ था बल्कि प्रमुख पर अभद्रता का भी आरोप लगा था।

ब्लॉक के बाद लघु सिंचाई विभाग के जे.इ. आदि जिस तरह कम सामान देकर उसी के साथ कई मानकों को दरकिनार कर किसानों को जिस तरह चूना लगाते हैं वह हम ऊपर पहले समाचार में लिख ही चुके।

-टाइम्स न्यूज़ गंगेश्वरी.


Gajraula Times  के ताज़ा अपडेट के लिए हमारा फेसबुक  पेज लाइक करें या ट्विटर  पर फोलो करें. आप हमें गूगल प्लस  पर ज्वाइन कर सकते हैं ...

गजरौला टाइम्स की ताज़ा अपडेट प्राप्त करने के लिए अपना इ-मेल दर्ज करें :

Delivered by FeedBurner