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पार्टी और पार्टी से बाहर, दोनों जगह तंवर का विरोध

टिकट कटने की आशंका से घबराये हुए हैं अमरोहा सांसद कंवर सिंह तंवर.

यहां के भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे कर चुके। बचे दो वर्षों से भी कम समय रहने पर उन्हें शायद याद आनी शुरु हुई है कि सांसद को अपने क्षेत्र की ओर भी देखना चाहिए। आधे से अधिक समय गुजरने के बावजूद सांसद न तो संसदीय क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं और न ही आम जनता के बीच संवाद कायम कर पाये, संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों, जन समस्याओं अथवा सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रति सांसद बेहद उदासीन रहे हैं तथा आज भी उनके व्यवहार अथवा कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। वे अपने व्यवसाय तथा अपने बेहद निजि स्थार्थों की पूर्ति के निमित्त सांसद बने थे उसी में मस्त हैं। देखने में यही आया है कि अपने कारोबार की व्यवस्तता की थकान मिटाने के लिए जब कभी जरुरी समझते हैं तो अपने झनकपुरी स्थित फार्म हाउस पर एक-दो रात गुजार कर वापस चले जाते हैं। उनके चंद चहेते भाजपाई भी वहीं उनसे मुलाकात कर लेते हैं। काम भी, कोई हुआ तो इन्हीं का करवा दिया जाता है। जिन लोगों के वोटों से वे सांसद बने उन लोगों को न तो सांसद और न ही उनके चाटुकार चेले चपाटों को कोई सरोकार है।

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यह पहले सांसद हैं जिनसे उनकी पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता और पदाधिकारी सहमत नहीं। अनुशासन की डेार में बंधे होने के नाते कई भाजपाई चाहते हुए भी उनकी आलोचना नहीं करते लेकिन इतना जरुर कहते हैं कि यदि इस बार इनको उम्मीदवार बनाया गया तो वे समर्थन नहीं करेंगे। सांसद के कारण पार्टी में नये और पुराने भाजपाईयों में गुटबंदी उभर रही है। कई ऐसे लोगों को सांसद गले लगाये फिर रहे हैं जिन्होंने विधानसभा चुनावों में पार्टी उम्मीदवारों को हराने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया।

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हाल ही में प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की बैठक में एक मान्यता प्राप्त पत्रकार द्वारा एक सवाल पूछने पर सांसद उस पत्रकार से उलझ पड़े थे जबकि उनके साथी पत्रकारों और भाजपा के मौजूद नेताओं ने भी सांसद के व्यवहार पर आपत्ति प्रकट की थी। सांसद के इस व्यवहार से संसदीय क्षेत्र के वे भाजपाई उनके खिलाफ दिखाई दिये जो खुलकर नहीं बोल पा रहे थे।

सांसद से खफा लोगों ने उनका पुतला फूंका

इस घटना से सांसद को अपनी कमजोर स्थिति और समर्थकों के विरोधी मिजाज का पता चल गया। उन्होंने परेशान होकर कार्यकर्ताओं तथा नाराज पत्रकारों को मनाने के लिए दो जून को अपने झनकपुरी के फार्म हाउस पर दावत पर आमंत्रित किया। कई मुंह लगे पत्रकार उनके बुलाने पर पहुंच भी गये जबकि बहुत से विरोध स्वरुप नहीं पहुंचे।

गुर्जर गर्दी से भाजपा में घमासान

जानकारों का कहना है कि तंवर इस बार नहीं जीत सकते। यह पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर संगठन के नेताओं तक को पता है। ऐसे में टिकट कटने से भयभीत सांसद लोगों की मान मनव्वल पर उतर आये हैं। लोग अनुमान लगा रहे हैं कि पूर्व विधायक हरपाल सिंह का विधानसभा चुनाव में टिकट काटकर हाइकमान ने जिस सूझबूझ का परिचय दिया। उसी सूझबूझ बल्कि उससे भी गंभीर मंथन कंवर सिंह तंवर की उम्मीदवारी को लेकर करना होगा।

अब बुलाने से भी नहीं आते बिन बुलाये आने वाले

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.


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