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गांवों में कई गुना बिजली दरें बढ़ाने की तैयारी, गन्ना मूल्य घटाया

खेती से जुड़े तबके सरकार की नीयत को समझने लगे हैं तथा किसान संगठन इस दिशा में मुखर भी हो रहे हैं.

चुनावों में भारतीय जनता पार्टी जहां गांव, गरीब और किसान की बात करती आ रही है। चुनाव जीतने के बाद वह इन तीनों पर शिकंजा कसना शुरु कर चुकी। संक्षेप में कहा जाये तो भाजपा चुनाव पूर्व वोट वालों के पास जाती है और सत्ता मिलते ही नोट वालों की गोद में जा बैठती है। भारत की जनता की एक बड़ी तादाद उसके छलावे में पिछले साढ़े तीन साल से आती जा रही है। इस दरम्यान जैसे-जैसे भाजपा की ताकत बढ़ती जा रही है उसका असली चेहरा लोगों के सामने आता जा रहा है। संसद और देश के अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं में उसका भारी बहुमत है। अब प्रधानमंत्री से लेकर उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति के पदों पर भाजपा का कब्जा बरकरार है। अब भाजपा के पास देश की सत्ता की संपूर्ण शक्तियां हैं। वह चाहे तो इस ताकत का इस्तेमाल देश के गांव, गरीब और किसान के जीवन को बेहतर बनाने और चंद लोगों की मुट्ठी में पहुंच रहे धन को संतुलित अंतर प्रदान करने में लगाये अथवा इसके विपरीत पहले से फैलती जा रही अमीर-गरीब के बीच की खायी को और बढ़ाते हुए अमीरों की गोद में जा बैठे।

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गरीबों की तरफदारी का ढिंढोरा पीटते-पीटते तीन साल में गरीबों का अभी तक कुछ भी भला नहीं हो सका बल्कि पूंजीपति उद्योगपतियों, फिल्मी सितारों और क्रिकेटरों की कमाई में सरकार ने पूरी ताकत झोंक रखी है। सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार में टीवी और बड़े अखबारों में कई अभिनेता-अभिनेत्रियों तथा क्रिकेटरों को लगाया गया है। कई अलग-अलग जगह अम्बेस्डर बनाये गये हैं। पहले ही बेतहाशा धन संपत्तियों के स्वामी इन लोगों के लिए सरकार ने सरकारी खजाना खोल दिया है। इनमें से एक क्रिकेटर तो पीने का पानी भी विदेश से मंगाता है।

फिलहाल तैयारी चल पड़ी है कि गांव वालों का बिजली मूल्य तीन से चार गुना तक किया जायेगा। जबकि उद्योगों के लिए बिजली बिल पूर्ववत ही रहेगा। पहली बार उर्वरकों पर जीएसटी के बहाने कर थोपकर किसानों पर पहले ही बोझ डाल दिया गया है। कीटनाशकों, ट्रैक्टर के पुर्जों तथा बैलगाड़ी के टायर सैट पर भारी भरकम टैक्स भी जीएसटी के बहाने लगाया गया है। पहले ही खर्च अधिक तथा उचित मूल्य न मिलने से किसान परेशान था, उसे राहत देने के बजाय उसकी कमर तोड़ने का यह प्रयास उसे बुरी तरह बरबाद करके रख देगा। गांव वालों पर बिजली की दरों में भारी इजाफा नलकूप से लेकर वहां बसने वालों के घरों आदि में प्रयोग हो रही गरीब-मजदूर तक सभी के लिए होगा।

गैस सब्सिडी भी वित्त वर्ष के अंत तक पूरी तरह खत्म होगी जबकि उद्योगों को गैस और डीजल पर दी जा रही यह रियायत जारी रहेगी। इसी के साथ उनको मिलने वाली विद्युत दरें भी नहीं बढ़ायी जायेंगी। सरकार गरीबों पर मार और अीमरों से प्यार के मार्ग पर अब तेजी से बढ़ेगी। गरीबों के वोटों से मिली ताकत अब उन्हीं के खिलाफ चल निकली है।

गन्ना उत्पादक किसानों पर भी गाज गिरने जा रही है। केन्द्र ने फैसला किया है कि इस बार किसानों को 255 रुपये गन्ना मूल्य दिया जायेगा। इसी के साथ उसने राज्य सरकारों द्वारा दिये जाने वाले अतिरिक्त मूल्य प्रदान करने पर भी रोक लगा दी। ऐसे में गन्ना पिछले साल से लगभग पचास रुपये सस्ता हो जायेगा। चुनावों से पूर्व किसानों की आय दोगुनी कराने और उन्हें लाभकारी मूल्य देने का वायदा करने वाली सरकार की नीतियों और नीयत का पता किसानों को अच्छी तरह लग जायेगा।

खेती से जुड़े तबके सरकार की नीयत को समझने लगे हैं तथा किसान संगठन इस दिशा में मुखर भी हो रहे हैं। महाराष्ट्र के मराठा आंदोलन, गुजरात में पाटीदार आंदोलन, हरियाणा का जाट आंदोलन और पंजाब चुनाव में भाजपा-अकाली सरकार की करारी हार किसानों में भाजपा के खिलाफ उत्पन्न आक्रोश के नतीजे हैं।

-जी.एस. चाहल.


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