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धार्मिक पाखंड दुराचार का सबसे सरल साधन

नेताओं से इन बाबाओं को आर्थिक ताकत मिलती है और कई अनैतिक कार्यों को करने का सुरक्षा कवच भी.

धर्म की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण का इतिहास उतना ही पुराना है जितना पुराना मानव इतिहास में आध्यात्मिक और धार्मिक चेतना का जन्म। हमारे देश के प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक इतिहास में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं जब बड़े-बड़े चरित्रवान, धर्मध्वज वाहक तथा ईश्वर का अवतार कहे जाने वाले लोगों ने महिलाओं को धर्म की आड़ में अपनी यौन पिपासा का साधन बनाया। धर्म की आड़ और संतानोत्पत्ती आदि के बहाने यह सब किये जाने की कहानियों से अनेक ग्रंथों के पन्ने भरे पड़े हैं।

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हमारे देश के एक भाग के कई मंदिरों में देवदासी प्रथा देखी गयी जो प्राचीनकाल से धर्म की आड़ में सबसे घिनौनी महिला बल्कि किशोर बच्चियों के साथ की जाने वाली हरकत आज तक किसी न किसी रुप में जारी थी। इस तरह के उदाहरण दिये जायें तो कई ग्रंथ भर जायेंगे। एक बाबा राम रहीम के ऐसे ही प्रकरण में आने से बाबाओं और धार्मिक चोलाधारी कथित संतो के चरित्र पर सवाल उठना स्वाभाविक और अनिवार्य है।

केवल झूठी-सच्ची चमत्कारिक कहानियां घड़कर लोगों को बहकावे में डालने वाले धर्मध्वजधारी लोगों पर भरोसा करने वालों की दुनिया भर में कमी नहीं लेकिन हमारे देश में यह कुछ ज्यादा ही है। इन कहानियों को सुनकर कई समझदार और पढ़े-लिखे लोग भी ढोंगी बाबाओं के पीछे हो लेते हैं। इनमें से अधिकांश ढोंगियों को जहां धर्म और आध्यात्म का बहुत ही सीमित ज्ञान होता है वहीं उनमें से कई अच्छे वक्ता भी नहीं होते तथा बड़े अजीबोगरीब ढंग से मंच से अपनी बात कहते हैं। फिर भी देखा-देखी उनके पीछे भीड़ जुटनी शुरु हो जाती है और 'गतानुगतिको लोके’ की उक्ति साकार हो जाती है।

इस तरह के धर्म स्थलों पर अवैध कमाई जिसे नंबर दो की कहने में भी कोई गलत नहीं होगा आनी शुरु हो जाती है। विपदाओं के मारे तथा निर्धन लोग भी अपने सामर्थ्य से यहां दान देते हैं लेकिन बड़े कारोबारी, फिल्म और क्रिकेट से जुड़े लोग तथा राजनीति के खिलाड़ी यहां भारी भरकम फंड जमा कराते हैं। इस वर्ग के लोगों को जब इन धूर्त ढोगियों के आगे दंडवत होते और आशीर्वाद लेते आम आदमी देखता है तो उसके मन में यह विचार आना स्वाभाविक है कि जब इतने बड़े-बड़े लोग इस महाराज के आगे नतमस्तक हैं तो इस व्यक्ति में कोई न कोई शक्ति है। यह वास्तव में महान आत्मा है। क्यों न इसकी शरण में जाकर इसका आशीर्वाद लिया जाये।

नेता, अभिनेता और उद्योगपतियों के साथ इन कथित बाबाओं के फोटो मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित होते हैं। इससे बाबाओं और बड़े लोगों, दोनों को ही लाभ होता है। चुनाव प्रचार में बाबा अपने भक्तों को जिसे चाहते हैं समर्थन का इशारा देते हैं। वास्तव में नेताओं से इन बाबाओं को जहां आर्थिक ताकत मिलती है वहीं पर्दे के पीछे जारी उनके कई अनैतिक कार्यों को करते रहने का मजबूत सुरक्षा कवच भी उपलब्ध रहता है।

धीरेन्द्र ब्रह्माचारी जो धार्मिक ठगी में वर्षों तक भारत समेत कई देशों के सत्ता शिखर पर बैठी शक्तियों को अपने इशारों पर नचाता रहा, जब पर्दे के पीछे का रहस्य उजागर हुआ तो वह खतरनाक हथियारों का तस्कर निकला। भारत ही नहीं बल्कि विश्व राजनीति पटल पर अपनी धाक जमाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उसे नहीं पहचान सकीं।

अमरोहा जनपद में बीसवीं सदी के पांचवें दशक में मुकीमपुर गांव में एक मामूली सन्यासी ने ऐसा माहौल बनाया कि घरवालों की बात दरकिनार कर उसके इशारे पर तमाम महिलायें उसके साथ नृत्य करने लगी थीं। बाद में एक मुठभेड़ में पुलिस को भारी बल प्रयोग के सहारे किसी तरह उसे काबू में किया गया।

ढोंगी बाबाओं के इस तरह के अनंत किस्से हैं और अनंत बाबा आज भी यहां मौजूद हैं। यदि इस तरह के बाबाओं को एक-एक कर खंगाला जाये तो पता नहीं पर्दे के पीछे क्या-क्या मिलेगा? लेकिन यह सब बिल्ली के गले में घंटी बांधने की तरह ही है। राम रहीम प्रकरण के खुलासे का श्रेय उन तीन पीड़ित लड़कियों को तो है ही जो बेखौफ इस मामले से जूझती रहीं। इसी के साथ सीबीआइ के जज जगदीप सिंह तथा इस मामले में सबूत जुटाने वाली टीम ने बहुत बड़ा काम किया है। नेता, सरकार या मीडिया सहयोग दें तो दूसरे भी कई प्रकरण सामने आयेंगे।

-जी.एस. चाहल.


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