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शौचालयों के लिए सरकारी सहायता को ठुकराया | amroha

यदि इसी तरह की जागरुकता सभी गांवों में आ जाये तो देश तरक्की की तेज रफ्तार पकड़ लेगा.

अमरोहा जनपद के गांव भैड़ा भरतपुर के लोगों ने शौचालयों के महत्व को समझते हुए सरकारी सहायता को ठुकराकर अपनी जेब से पैसा खर्च कर उन गांवों के लोगों को आईना दिखाया है जहां शौचालयों के बहाने सरकारी धन की बंदरबांट में आयेदिन विवाद हो रहे हैं तथा फिर भी ऐसे गांव ओडीएफ नहीं हो पा रहे।

भैड़ा भरतपुर बसपा नेता पूर्व ब्लॉक प्रमुख जयदेव सिंह का गांव है। यहां के लोग कृषि और दुधारु पशुपालन के बल पर जीवन यापन कर रहे हैं। चन्द लोग व्यापार तथा नौकरियों में भी संलग्न हैं। यहां पहले ही काफी लोगों के घरों में शौचालय थे। बाकी बचे 34 लोगों को इसकी जरुरत महसूस हुई तथा इसके महत्व को उन्होंने समझा तथा गांव को ओडीएफ करने का अभियान चला। तो सरकार से मिल रहे प्रति शौचालय बारह हजार रुपयों की बात भी इन लोगों के सामने आयी। ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव से लेकर उस धन की बंदरबांट में उन्हें पता चला कि इससे तो सरकारी खजाने का दुरुपयोग होगा।

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इन सभी लोगों ने इस तरह की आर्थिक सहायता को ठुकराना ही बेहतर समझा तथा इसके बिना अपने खर्च से अपने लिए बढ़िया शौचालयों का निर्माण कराया। यह समाचार जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल तक पहुंचने में देर नहीं लगी। वे आननफानन में गांव पहुंचे तो अपने बल पर गांव को ओडीएफ बनाने वाले लोगों को सार्वजनिक रुप से सम्मानित किया और उन्हें प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किये।

इस मौके पर आसपास के गांवों के लोग भी आये थे। डीएम ने कहा कि वास्तव में भैड़ा भरतपुर के लोगों ने एक मिसाल कायम की है। दूसरे सभी गांवों को इससे सबक लेना चाहिए। यदि इसी तरह की जागरुकता सभी गांवों में आ जाये तो देश तरक्की की तेज रफ्तार पकड़ लेगा। साथ ही व्याप्त भ्रष्टाचार अपनी मौत मारा जायेगा।

इससे पूर्व इसी जनपद के गांव छीतरा में 1975 में मुंशी निर्मल सिंह के आहवान पर आधा किलोमीटर तक रास्ते में भरने वाले पानी से निजात के लिए श्रमदान कर गांव वालों ने दोनों ओर पक्की नालियों का नाला बनाकर बीच में ऊंची सड़क निकाल दी थी। इस पानी के लिए गांव से बाहर तालाब खोदकर, वहां की मिट्टी से रास्तों में भराव डाला था। तब से आजतक वहां कीचड़ या जल भराव नहीं होता। गांवों में इस तरह की जागरुकता की जरुरत है।

-जी.एस. चाहल.


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