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कृषि की बरबादी की कहानी लिख गये उद्योग

factory pic by gajraula times
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में उपजाऊ कृषि भूमि थी वहां ऐसी इकाईयां क्यों लगायी गयीं जिनका यह भी पता नहीं था कि वे सफल होंगी भी या नहीं। ऐसा होने से किसानों, मजदूरों, उद्योगपतियों और सरकार सभी को क्षति पहुंचती है..pic : gajraula times.
अमरोहा जिले के विकास खण्ड गजरौला के विशाल उपजाऊ कृषि भू-भाग को औद्योगिक विकास के नाम पर सरकार ने अधिगृहीत कर जिस तरह कंक्रीट के जंगल और बंजर भूमि में तब्दील कर बरबाद किया है उससे किसी का भी भला नहीं हुआ। यहां की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि किसानों के हाथों से निकल जाने से कृषि पैदावार समाप्त हो गयी। उसपर दशकों पूर्व लगीं लगभग एक दर्जन औद्योगिक इकाईयां विभिन्न कारणों से असमय बन्द हो गयीं जहां की जमीन पर कंक्रीट बिछी पड़ी है। लाख प्रयास के वावजूद उसे कृषि योग्य नहीं बनाया जा सकता।

यहां श्री एसिड्स एण्ड कैमीकल्स लि., बैस्ट बोर्ड्स लि., शिवालिक सेल्यूलोज लि., एस.एस. ड्रग्स, सिद्धार्थ स्पिन फैब, रतन बनस्पति, चड्ढा रबर्स, सी.एन.सी. मेटल्स आदि कई औद्योगिक इकाईयां अच्छी हालत में चलने के बावजूद बन्द हो गयीं। जबकि टेवा, रौनक ऐसी स्थिति में हैं जहां प्रबंधन-मजदूर विवाद उन्हें बंदी तक ले जा सकता है। यू.एस. फूड्स बन्द हो गयी है और कोरल न्यूज प्रिन्ट भी बीमार है। केवल जुबिलेण्ट लाइफ साइंसेज लि. के अलावा यहां किसी इकाई का भविष्य उज्जवल नहीं।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में उपजाऊ कृषि भूमि थी वहां ऐसी इकाईयां क्यों लगायी गयीं जिनका यह भी पता नहीं था कि वे सफल होंगी भी या नहीं। ऐसा होने से किसानों, मजदूरों, उद्योगपतियों और सरकार सभी को क्षति पहुंचती है। इसी के साथ पर्यावरण को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। यहां का हरा भरा जंगल तहस-नहस हो गया है। इससे पशु-पक्षी, चारागाह और प्राकृतिक जलस्रोत भी तबाह हो गये।

जिस क्षेत्र में श्री एसिड्स एण्ड कैमी., यू.एस. फूड्स, सिद्धार्थ स्पिन फैब और रतन वनस्पति थी वहां धन का सबसे अच्छा क्षेत्र है जो पूरी तरह चौपट हो गया। यहां के वृक्षों का सफाया होने से मोर, जंगली कबूतर, गोरैया, कव्वा, घुग्घी आदि पक्षी गायब होते जा रहे हैं।

उद्योग स्थापित होने पर जो युवक उनमें रोजगार पा चुके थे उद्योग बन्द होने पर वे फिर बेरोजगार होकर घर बैठ गये। उन्हें कहीं और भी काम नहीं मिल पा रहा। लेकिन किसानों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।

-टाइम्स न्यूज अमरोहा

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