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अब बुलाने से भी नहीं आते बिन बुलाये आने वाले

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विधायक एम.चन्द्रा और सांसद कंवर सिंह तंवर को बहुत दिनों से क्षेत्र के लोगों ने देखा नहीं.
विधान सभा और लोकसभा दोनों ही जन प्रतिनिधित्व स्तर पर यदि आकलन किया जाये तो मंडी धनौरा विधान सभा क्षेत्र के मतदाता इस बार जिले के बाकी सारे विधानसभा क्षेत्रों के विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से उपेक्षित मतदाता हैं। कभी-कभी तो ऐसा महसूस होता है जैसे कि यहां कोई विधायक अथवा सांसद है ही नहीं। गजरौला विकास खंड के लोग तो विधायक को जानते ही नहीं और सांसद के दर्शन तक नहीं किये। ऐसा यहां पहली बार हुआ है। वैसे गजरौला के चुनिंदा लोगों के यहां नौगांवा सादात विधायक अशफाक अली खां का आवागमन बना रहता है।

हसनपुर विधानसभा क्षेत्र को विभाजित कर बीते विधानसभा चुनाव में मंडी धनौरा पहली बार विधानसभा क्षेत्र बना। जहां से एम. चन्द्रा को बसपा विरोधी लहर में मामूली प्रचार में विजय मिल गयी। धनौरा के मूल निवासी होने के कारण भी उन्हें बढ़त मिली। इन दो कारणों को वे अपनी लोकप्रियता मानने की भूल किये  हुए धनौरा से बाहर नहीं निकलते और चाहते हैं लोग उनके द्वार ऐसे आयें जैसे किसी राजदरबार में हाजिरी देते हैं। लिहाजा वे गजरौला क्षेत्र में अपने कार्यकाल के आधे सूर्यास्त तक भी कहीं दिखाई नहीं दिये। यहां के लोगों को यह भी पता नहीं कि उनके विधायक का हुलिया कैसा है? अधिकांश लोग उन्हें पहचान भी नहीं पायेंगे।

कई बार अखबारों में मंडी धनौरा से छपी खबरों से पता चलता है कि विधायक मंडी धनौरा में अपने कार्यालय पर आये थे और कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले थे अथवा अमरोहा पार्टी की बैठक में सपा नेताओं के साथ मौजूद थे। इसके अलावा प्रायः वे क्षेत्र की जनता के लिए बेखबर ही रहते हैं।

जब मंडी धनौरा और गजरौला, हसनपुर विधान सभा सीट के हिस्सा थे तब बछरायूं से चै. रईसउद्दीन वारसी, चौ. रिफाकत हुसैन विधायक रहे। वे हमेशा जनसंपर्क में रहते थे। खादगूजर के चौ. महेन्द्र सिंह भी विधायक रहे।

गजरौला के रमाशंकर कौशिक के बारे में सभी जानते हैं। वे छोटे-बड़े सभी लोगों से मिलते रहे। देवेन्द्र नागपाल तो गांव-गांव, घर-घर तथा राह चलते बच्चों तक से हाथ मिलाते रहे हैं। ऐसे-ऐसे जनप्रतिनिधि मंडी धनौरा क्षेत्र को मिले हैं। लेकिन यह पहली बार हुआ है कि यहां विधायक होते हुए भी जनता स्वयं को विधायक विहीन मान रही है।

केवल विधायक ही नहीं सांसद भी उसी रौ में हैं बल्कि हो सकता है वे विधायक से भी आगे निकलें। क्योंकि सांसद कंवर सिंह तंवर को चुनाव जीते चार महीने बीत चुके और इन चार माह में वे चुनाव से पूर्व जो वादे कर रहे थे याद तक करने को जनता के बीच नहीं आये। गांवों के लोग उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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उनके मोबाइल अस्पताल क्षेत्र से गायब हैं। उनके सेवा केन्द्र पर उनके दर्शन नहीं होते। जबकि वे खादर के लोगों को बाहे पर पक्का पुल अपने खर्च पर बनाने का वादा कर गये थे। चकनवाला समेत डेढ़ दर्जन गांवों के लोग आज सांसद की राह देख रहे हैं। उनका कहना है कि सांसद मिल जाये तो घेराव करेंगे।

मंडी धनौरा विधानसभा क्षेत्र के लोग कह रहे हैं कि हमसे तो अमरोहा और हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के लोग बेहतर हैं वहां के प्रतिनिधि मंत्री हैं तथा हर समय क्षेत्र की जनता के सम्पर्क में रहते हैं तथा लोगों के दुख-दर्द में तुरंत पहुंचते हैं। नौगांवा विधायक भी अपने क्षेत्र में बराबर जनसम्पर्क जारी रखते हैं।

मंडी धनौरा विधायक को अपनी पार्टी के तीन अन्य विधायकों की तरह क्षेत्र का दौरा कर जन समस्याओं का जायजा लेकर उनका निराकरण करना चाहिए। तहसील, ब्लाक, स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस विभाग में समय-समय पर जाकर सरकारी कामकाज का जायजा लेना चाहिए। वहां मौजूद परेशान लोगों की समस्याओं का हल कराना चाहिए। घर बैठे राशन डीलरों की समस्यायें सुनने से जनता खुश नहीं होगी। 

-टाइम्स न्यूज मंडी धनौरा
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