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अंगद के पांव ने लड़ा दिया पुलिस व ग्रामीणों को (तस्वीरें भी साथ में)

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ढकिया भूड़ में हुए इसी तरह के राशन डीलर विवाद को तूल देने के प्रकरण में भी वही अंगद का पांव अड़ा था..

शनिवार को गरीबों के गल्ले की खींचतान में क्षेत्र की कानून व्यवस्था बिगड़ते-बिगड़ते रह गयी। थाना गजरौला की समझदारी और मुस्तैदी ने तो इसमें अहम भूमिका अदा की ही लेकिन भारापुर के कई बुजुर्ग लोगों ने भी उग्र होते दंगे को थामने में सहयोग दिया यह दीगर बात है कि कानूनी दायरे में दोनों गांवों के कई बेकसूर लोगों को भी कसूरवार ठहराकर पुलिस परेशान करने में जुट गयी है। वैसे तह में जाने पर पता चलता है कि विकास खंड कार्यालय में अंगद का पांव बना एक अधिकारी इस काण्ड की पूरी पटकथा को अंजाम देने वाला है। ढकिया भूड़ में हुए इसी तरह के राशन डीलर विवाद को तूल देने के प्रकरण में भी वही अंगद का पांव अड़ा था। मजेदार बात यह है कि इस व्यक्ति का नौकरी का अधिकांश कार्यकाल गजरौला ब्लाक में बीता है। कुछ दिनों पूर्व स्थानांतरण होने पर इस महोदय ने फिर यहां को ही तबादला करा लिया। यहां से बेहतर स्थान इस अधिकारी को कोई जंचता ही नहीं। ब्लाक में लंबे समय तक रहने से सभी गांवों की नब्ज-नाड़ी का पता है। इसलिए अंगद के पांव की तरह महोदय यहां से हटने को तैयार ही नहीं होते और अब तो रिटायर होने वाले हैं। यहीं आये, यही से जायेंगे।

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भारी हंगामे के बाद सभा में कुर्सियों को भी तितर बितर कर दिया गया।


ये हैं सहायक विकास अधिकारी मंगू सिंह। इनके पास पंचायत विभाग है। आपका अधिकांश कार्यकाल गजरौला ब्लाक में ही व्यतीत हुआ है। शनिवार को मंगू सिंह, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी महीपाल सिंह के साथ पाल गांव में राशन डीलर का चयन कराने गये थे। जहां चार बार पहले भी ग्राम प्रधान और उनके चहेते डीलर की मनमानी के कारण चयन नहीं हो सका। इस बार पुलिस बल भी ले जाया गया था। भारापुर के लोग भी मौके पर थे। नये आदेश में चार हजार यूनिटों पर डीलर का चयन होना था।

जरुर पढ़ें : कानून व्यवस्था को तो एडीओ मंगू सिंह से खतरा था

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अव्यवस्था के कारण मोटरसाइकिल जैसे वाहन भी गिरा दिये गये..


यह कितनी मजेदार बात है कि जो अधिकारी डीलर का चुनाव कराने गया है वह इस बात से अनभिज्ञता प्रकट करने लगा कि कितनी यूनिटों पर चयन होगा? मामले को जानबूझकर विवादित बनाने के लिए भारापुर के लोगों को वहां से भगाने के लिए एडीओ मंगू सिंह नियम से नादान बन गये। जब विवाद बढ़ने लगा तो किसी ने कहा कि जिला मुख्यालय से मालूम कर लो जब तक वहां से मालूम किया तबतक लोगों में हाथापाई हो चुकी थी। जिसे रोकने को पुलिस ने हस्तक्षेप किया तो भीड़ ने पुलिसवालों की भी पिटाई कर दी। एक दारोगा, तीन कांस्टेबिल और एक होमगार्ड घायल हो गये। वीडीओ महीपाल सिंह भी चपेट में आये। चालाक एडीओ पहले ही किनारे हो लिये थे जोकि इस घटना के मूल वाहक थे।

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पुलिस द्वारा गांव के लोगों को समझाने की पूरी कोशिश की गयी.


आनन फानन में बछरायूं और मंडी धनौरा और रजबपुर थानों की पुलिस बुलायी गयी। गजरौला के एसओ सुमन कुमार सिंह तुरंत ही मौके पर पहुंच गये थे। तब कहीं मामला शांत हुआ।
इस प्रकरण में बवाल के दौरान मौजूद दारोगा विक्रांत यादव की ओर से 28 नामजद तथा 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है तथा आगे की कार्रवाई जारी है।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा हालात में यदि पुलिस थोड़ी भी ढील बरतती या कोई चूक हो जाती तो बवाल बड़ा रुप ले सकता था। यहां निकटवर्ती गांवों में आपसी सद्भाव और बेहतर तालमेल भी शांति बनाये रखने में सहायक है।

गजरौला टाइम्स न्यूज गजरौला

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