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पैसा तो देश में ही बहुत है

हमारे देश की स्थिति आज उस कस्तूरी मृग की भांति हो चुकी है जो अपनी नाभि में कस्तूरी लिए उसकी तलाश में पागल होकर जंगल-जंगल भागता फिरता है। हमारे देश में अकूत आर्थिक सम्पदा है जो भारतीय और विदेशी मुद्रा के रुप में देश के अन्दर ही मौजूद है। सोना-चांदी और आभूषणों के रुप में भी उसके अथाह भंडार मौजूद हैं। कुछ लोग रत्नजटित वस्त्र पहनकर भी इस देश में अपनी शान-ओ-शौकत का प्रदर्शन करते देखे जाते हैं।

यहां के नेताओं और अभिनेताओं तथा क्रिकेटरों के पास अनापशनाप खर्च करने के बाद भी अथाह धन और सम्पदायें हैं। इनसे जयललिता की तरह हिसाब लिया जाये तब भी ये जेल तो जा सकते हैं, लेकिन इनका लूटा धन देश को वापस मिलना बड़ा मुश्किल हो जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, उनके तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, ओमप्रकाश चौटाला, राजद नेता लालू प्रसाद यादव जैसों को आरोपों-प्रत्यारोपों के बाद भी आर्थिक अपराधों में यहां कौन सजा दिलाने वाला है। देश में इस तरह के नेताओं की सूची लंबी है जिनपर आर्थिक भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं या दोषी पाये गये हैं। कुछ लोग जेल भी गये हैं, कुछ पर मुकदमे भी चल रहे हैं और कुछ पर मुकदमे चलने की मंजूरी ली जा रही है। इसमें भी उनके कद-काठी का आकलन होता है जबकि कहा जाता है कि कानून सबके लिए बराबर है।

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मनरेगा हो, राशन का अनाज हो, गरीबों के आवास या शौचालयों या छात्रवृत्ति योजना हो, ग्रामीण स्वास्थ्य योजना हो सभी में बंदरबांट के भेद खुल रहे हैं। अधिकारी, नेता और दलाल अधिकांश धन हजम कर रहे हैं। सड़क निर्माण, नाली, खड़ंजे, पुल जो भी काम हो रहा है कमीशनखोरी की पोल खुल रही है। यह पैसा देश के अंदर है। जिन लोगों के पास है उनके पास से बाहर निकाला जाना चाहिए।

इसी तरह के लोग पत्थर की मूर्तियों पर लाखों के मुकुट और अन्य उपहार दे रहे हैं। धार्मिक  आयोजनों में सबसे बड़ी भूमिका भी इन्हीं की होती है। धार्मिक ट्रस्ट इसी तरह के लोगों के धन से चल रहे हैं। गरीबों की लूट खसोट को पत्थरों पर लुटाया जा रहा है जिसे देश में धर्माथ मान लिया गया है। यदि सारे धर्म स्थलों के धन दशमांश भी देश के विकास कार्य में लगा दिया जाये तो भारत के विकास को काफी गति मिल सकती है।

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यह सभी जानते हैं कि देश में भ्रष्टाचार व्याप्त है जिसे राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। देश में बेहिसाब ऐसे संगठित गिरोह बन चुके हैं जिनके पास अथाह संपत्तियां एकत्र हो गयी हैं। वे उन्होंने अपवत्रि गठबंधनों और जोड़तोड़ के बल पर दूसरों का धन अवैध रुप से हथिया कर एकत्र की हैं। ऐसे में संसाधनों और धन का बंटवारा बहुत ही असंतुलित हो गया है। कुछ लोग बहुत धनवान हो गये और कुछ बहुत निर्धन रह गये।

हमारी सरकार को चार माह हो गये। वह बार-बार विदेशी निवेश के लिए विदेशियों के द्वार पर दस्तक दे रही है। कभी उन्हें आमंत्रित कर रही है। चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश के राष्ट्रपति को भी हमारे प्रधानमंत्री अपने घर बैठकर पालने में झुला रहे हैं। य तो अभी भविष्य में पता चलेगा कि इसका क्या परिणाम होगा लेकिन विदेशी निवेश के सहारे तबतक काम नहीं चल सकता जबतक हम अपनी व्यवस्था को नहीं सुधारते। बाहर भागकर समय खराब करने के बजाय हमें स्वयं को सुधारना होगा। पैसा तो देश में ही बहुत है। उसे बाहर निकालने वाला नेता चाहिए।

मोदी जी अपना 56 इंची सीना अब चौड़ा करिये, देश का काला धन बाहर निकालिये, बाहर भागने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। साथ में स्वामी रामदेव जी को भी ले लीजिये काला धन बाहर करने की सबसे बेहतर दवा चुनाव से पहले उनके पास भी थी।

-जी.एस. चाहल.

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