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ब्रजघाट को तीर्थ स्थल का रुप देने का काम उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरु कर दिया है। यहां गंगा नदी के दोनों ओर एक किलोमीटर तक पक्के घाट बनाने के लिए राज्य सरकार ने पांच करोड़ रुपये मंजूर किये हैं। वैसे यहां के सौन्दर्यीयकरण आदि के लिए सिंचाई विभाग की ओर से सौ करोड़ रुपयों की एक विस्तृत परियोजना का प्रारुप तैयार कर सरकार को भेजा गया था जिसमें हरिद्वार की हर की पैड़ी की तरह गंगा का वातावरण और सौन्दर्य निखारने की मांग शामिल थी। फिर भी सरकार ने जो कदम बढ़ाया है वह एक अच्छी शुरुआत है। आगे चलकर तिगरी तक यह क्षेत्र एक बेहतर पर्यटक स्थल के रुप में विकसित किया जा सकता है।

याद दिला दें कि एक दशक से अधिक हमारे द्वारा बार-बार ब्रजघाट से तिगरी तक के गंगा तटवर्ती क्षेत्र के दोनों किनारों का सौन्दर्यीयकरण और विकास की मांग केन्द्र और राज्य सरकारों से उठायी जाती रही है। हम इसकी आवश्यकता और महत्व पर बार-बार लिखते आ रहे हैं। यह सुखद है कि राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और इसके लिए धन मुहैया कराया।

अब केन्द्र की भाजपा सरकार को यहां कम से कम सौ करोड़ रुपये खर्च करने चाहिएं। क्योंकि वह नमामि गंगा योजना चला रही है और उसका दायित्व भी अध्कि है तथा वह धार्मिक होने के दावे भी बढ़चढ़ कर रही है। वैसे भी इस विभाग की मंत्री साध्वी उमा भारती हैं।

उमा भारती गंगा नदी से लगाव के बड़े-बड़े दावे करती रही हैं लेकिन जबसे गंगा नदी से संबंधित एक अलग मंत्रालय केन्द्र सरकार ने बना दिया है तब से उनके दर्शन दुर्लभ हो गये हैं। यह भी पता नहीं चल रहा कि गंगा के उद्धार के लिए वे क्या-क्या कर रही हैं?

यदि दो करोड़ रुपयों का समायोजन भी ईमानदारी से हो गया तो दोनों ओर सुन्दर तथा पक्के घाट बनने से स्नान करने वालों को बहुत ही आराम हो जायेगा। यहां हो रहा रेत का अवैध खनन रुकेगा, साथ ही गंगा के दोनों तट दूर तक सुन्दर और सुरम्य दिखाई देंगे। यहां सफाई व्यवस्था भी बेहतर होगी। देखते हैं यह कब तक होता है और केन्द्र सरकार, राज्य सरकार के इस कदम से कुछ सीख लेती है या नहीं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.