केवल उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के लिए हैं यहां की बैंक

नगर में राष्ट्रीयकृत और निजि क्षेत्र की बैंकों की शाखाओं का जमघट है लेकिन अधिकांश बैंकों में छोटे बजट वाले अथवा निर्धन लोगों को खास तरजीह नहीं दी जा रही। दो—तीन बैंकों को छोड़कर शेष बैंकों में यहां की औद्योगिक इकाईयों सरकारी या गैर सरकारी धनी संगठनों, बड़े व्यापारियों व भू—कारोबारियों को ही महत्व दिया जाता है। छोटे किसानों की भी सुनवाई नहीं। छोटे खातेदारों को तो पैसा लेन—देन पर भी बहकाया जाता है।

उदाहरण के लिए यहां की कॉर्पोरेशन बैंक की शाखा को ही ले लीजिये। यहां जब से मौजूदा प्रबंधक ने कार्यभार संभाला है तबसे ग्राहकों को आयेदिन कनेक्टिविटी फेल बताकर रुलाया जाता है। छोटे ग्राहकों के साथ यह बहाना आम बात है। बैंक ने गिने—चुने धन कुबेरों के विशाल बजट के खाते खोलकर लक्ष्य पूरा कर लिया। ऋण भी बड़े बजट में गिने—चुने ग्राहकों को आवंटित किया गया है। अथवा बड़े लोगों की सिफारिश पर चन्द दूसरे लोगों का भी काम हो गया है। कृषि क्षेत्र में इस शाखा ने सबसे कम ऋण बांटा है।

यहां नयी खुली पीएसबी की शाखा ने सबसे अधिक कृषि क्षेत्र में ऋण वितरित किया है। मध्यम और कमजोर लोगों को अल्प समय में तेजी से ऋण प्रदान किया जा रहा है। प्रथमा बैंक की दोनों शाखायें तथा पंजाब नेशनल बैंक का काम भी संतोषजनक है। निजि क्षेत्र की सभी बैंकों में तो खाता खोलने को ही दस हजार रुपये तक का बहाना बनाया जा रहा है।

कुल मिलाकर बैंक शाखाओं की भारी संख्या के बावजूद यहां के आम आदमी को उनका वांछित लाभ नहीं मिल पा रहा।

-Gajraula Times News Gajraula.

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