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घोषणाओं के बाद भी क्यों नहीं हो रहा गंगा का उद्धार?


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गंगा स्वच्छता अभियान केन्द्र सरकार का महत्वाकांक्षी अभियान है। भाजपा की साध्वी उमा भारती के हाथ में बहुत कुछ है। वे यहां आकर कई बार इस क्षेत्र के महत्व को समझकर यहां सौन्दर्यीयकरण का वादा कर चुकीं लेकिन कुरसी मिलने के बाद वे भी मौन साध गयी हैं।

दरअसल चरचाओं, दावों और बार—बार की घोषणाओं के बावजूद यहां काम न होने के पीछे जो हकीकत है उसे सामने नहीं आने दिया जा रहा है। बताते चलें कि यहां गंगा के दोनों ओर दबंग और मजबूत खनन माफियाओं का राज है। कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद तमाम कानूनी बंदिशों को धता बताते हुए गंगा के दोनों ओर ऐसे तत्व बेखौफ रेत का अवैध कारोबार जारी रखे हैं। इस कारोबार में संलिप्त तत्वों को सत्ताधारी सफेदपोश पूरा संरक्षण प्रदान करते हैं। बल्कि परोक्ष रुप से यह कारोबार उन्हीं के हाथों में होता है। खनन विभाग, राजस्व विभाग, वन विभाग और पुलिस सभी विभागों की मिलीभगत से यह धंधा जारी है। इन महकमों के मामूली से कर्मचारी भी किसानों को एक ट्राली या एक बुग्गी मिट्टी अपने खेत से बिना परमीशन के लाने पर बंद कराने की धमकी देते हैं और कभी—कभी बंद भी कर देते हैं। गढ़मुक्तेश्वर में आयेदिन अपनी जरुरत को अपने खेतों से मिट्टी लाने वाले किसानों का उत्पीड़न होता है। उनके ट्रैक्टर और ट्रालियां तक सीज कर दी जाती हैं।

दूसरी ओर प्रतिदिन अगणित ट्रालियां गंगा के रेत से भरकर रेत माफियाओं के जरिये आती—जाती रहती हैं। इन्हें न पुलिस रोकती है, न वन विभाग, न ही खनन विभाग या और कोई। प्रतिदिन लाखों रुपयों का रेत अवैध कमाई का धंधा बना है। जो भी सत्ता में आया वही रेत माफियाओं का हमजोली बन कर अवैध कमाई में लिप्त हो जाता है।

ऐसे में प्रतिमाह करोड़ों की कमाई का साधन यह क्षेत्र है। यदि यहां पयर्टन स्थल को मंजूरी मिली और निर्माण शुरु हो गया तो रेत माफिया, सफेदपोश, पुलिस, खनन विभाग तथा वन विभाग की मोटी कमाई बंद हो जायेगी। यही कारण है कि जो नेता यहां सौन्दर्यीयकरण या पयर्टन स्थल का वादा करते हैं। बाद में वे इसका जिक्र तक नहीं करते। जबतक स्थानीय जनता इसके लिए जोरदार आंदोलन नहीं छेड़ेगी तबतक यह काम असंभव है। और जनता से यह उम्मीद है नहीं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.