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दूसरे जनपदों में छपते हैं नगर पंचायत के टेंडर

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नगर पंचायत ने साठ लाख से अधिक निर्माण कार्यों के ठेके अपने चहेतों को मनमानी कीमत में देने के लिए जिले से बाहर के अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करा दिया। विज्ञापन के अनुसार 13 अप्रैल को मांगी निविदायें 15 अप्रैल तक सील बंद लिफाफों में मांगी गयी थीं। जबकि नियमानुसार ऐसी निविदायें स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित होनी चाहिएं। इसका खुलासा एक दैनिक में होने पर नगर पंचायत ने यह सूचना रद्द कर दी। अब ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि यह सूचना अब किसी दूर के संस्करण में प्रकाशित करायी जायेगी।

यह बताना प्रसंगिक है कि नगर पंचायत के अधिकांश टेंडर जिले से बाहर के संस्करणों में ही प्रकाशित कराये जाते हैं। जिनके आधार पर नगर पंचायत जिसे चाहें टेंडर दे देता है। ये सभी टेंडर अधिशासी अधिकारी द्वारा प्रकाशन को दिये जाते हैं। यहां मौजूद इ.ओ. एक दशक से अधिक समय में नियम विरुद्ध सैकड़ों निविदायें बाहरी संस्करणों में प्रकाशित करा चुका। बार-बार ऑडिट होने के बावजूद इतनी बड़ी अनियमितता पकड़ में न आना लेखा परीक्षकों और इ.ओ. की मिलीभगत का सबसे शानदार नमूना है।

जब से यहां इ.ओ. मो. कामिल पाशा की नियुक्ति हुई है, कई बार बल्कि बीते 13 वर्षों में हर वर्ष निर्माण तथा सामान खरीददारी में घोटालों की जांच की मांग की गयी है। जांच लगभग सभी शिकायतों पर हुई है, शिकायतें बिल्कुल सच भी हुई हैं लेकिन जांचकर्ता जांच के बाद चुपचाप चलते बने हैं। अधिकांश जांचों में लीपापोती ही हुई है। दरअसल इस तरह की जांच जिला स्तर पर आती है। बाद में एसडीएम, फिर उससे नीचे और अंत में इ.ओ. तक आकर खेल खतम हो जाता है। जबकि इस सारे खेल का असली सूत्रधार इ.ओ. ही होता है। यदि उच्च स्तरीय जांच हो तो इ.ओ. के तेरह वर्षीय कार्यकाल में कई घोटाले सामने आ सकते हैं।

टेंडर छपे दूसरे जिलों के समाचार पत्रों की प्रतियां नगर पंचायत की रिकार्ड फाइलों में संलग्न भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष सबूत हैं।

अब धनौरा में भी चलेगा इ.ओ. का ’पाशा’
यह सभी जानते हैं कि लंबे समय तक जब कोई कर्मचारी या अधिकारी एक ही स्थान पर सेवारत रहता है तो वह वहां सुनियोजित ढंग से एक सुरक्षित माहौल का निर्माण कर लेता है। इस माहौल का लाभ वह गैरकानूनी कार्यों को सुरक्षित ढंग से करने में उठाता है। स्थानीय राजनीति तथा मजबूत तत्वों की सांठगांठ के सहारे अपना साम्राज्य स्थापित कर लेता है। यही यहां इ.ओ. कामिल पाशा ने किया है। जिसके कारण वे लगातार तेरह वर्षों से यहां से हिल नहीं सके। यही नहीं इसी के साथ उन्हें कई बार उझारी, बछरायूं, तथा दूसरे नगरों का अतिरिक्त कार्यभार भी दिया गया।

जिलाधिकारी ने मंडी धनौरा पालिका का अतिरिक्त भार पाशा सौंप कर पुरस्कृत किया है।

इ.ओ. तो जनपद में और भी हैं लेकिन जो पाशे फेंकने में पाशा माहिर हैं, वह दूसरे इ.ओ. नहीं कर सकते। यह और भी आश्चर्य का प्रकरण है कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार बार-बार अपने कर्मचारियों के तबादले थोक में करने के लिए चर्चित रही है, लेकिन कामिल पाशा उस दायरे में भी नहीं आ सके।

पाशा के पिता मुन्ना आकिल इसी जनपद से गत विधानसभा में कांग्रेस उम्मीदवार थे। पूर्व चेयरमेन अनिल गर्ग द्वारा चुनाव आयोग को यह स्मरण दिलाने के बाद भी कि पाशा इस चुनाव में अपने पिता को लाभ दिला सकते हैं, उनका तबादला जिले से बाहर नहीं किया गया। इतनी मजबूती से यहां पैर जमाये रखना ही अपने आप में सिद्ध करता है कि आखिर कौनसा बड़ा लालच है जो इ.ओ. गजरौला नहीं छोड़ना चाहते तथा कोई न कोई पाशा तैयार रखते हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला