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‘कोमल राजकुमार’ की राजनीति

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राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल खड़े करना ऐसा लगता है हर किसी के लिए आसान है। जो लोग उनपर सवाल खड़े करते हैं वे उसे अपना हक भी समझ सकते हैं क्योंकि ऐसा अवसर स्वयं राहुल ही उन्हें दे रहे हैं। उनकी राजनीति बहुत ही रोचक प्रतीत होती है। वे साहस करते हैं। हर कोई उनकी दहाड़ देखता है। मगर हद तब होती है जब गांधी परिवार का यह ‘कोमल राजकुमार’ जनता का भरोसा उस तरह नहीं जीत पाता।

56 दिन का ‘अज्ञातवास’ राहुल गांधी के लिए जितना मायने रखता है, उससे कहीं अधिक मायने विपक्ष के लिए भी रखता है। खासकर भाजपा को इस दौरान चटखारे लेने का खूब मौका मिला। उससे भी खास और मजेदार यह रहा कि उन्होंने उसे गंवाया नहीं। चर्चा होने लगी कि भाजपा के लिए किसानों की आत्महत्यायें अहम न होकर राहुल गांधी की तलाश अहम हो गयी। कहने को भाजपा के पास राजनीति में अनेक मुद्दे एकत्रित थे, लेकिन वे तो राहुल गांधी की खोज को सबसे बड़ा मुद्दा मानकर चल रहे थे। यह भी सही है क्योंकि विपक्षी खेमा बहुत समय बाद राहुल गांधी पर हमला बोलने को तैयार था जिसका जबाव उन्हें किसी ने खुलकर दिया भी नहीं।

राहुल गांधी के लिए राजनीति घाटे का सौदा है। उनकी भावी योजनायें भी शायद उन्हें किसी पायदान पर ले जायें यह कहना मुश्किल है। उनकी माता सोनिया गांधी राजनीति की मंझी हुई खिलाड़ी हैं जो हर मोरचे पर सफल साबित होती रही हैं। उनका मुकाबला इंदिरा गांधी से करना बेमानी है। इंदिरा की अपनी तरह की राजनीति थी जबकि सोनिया की राजनीति बदलते वक्त के साथ बदली है। जबसे अबतक भारत की राजनीति बहुत बदल चुकी है।

राहुल गांधी ने जो भी सीखा है वह अपनी मां से सीखा है। उनका हाल उस स्कूली बच्चे की तरह भी कहा जा सकता है जो कक्षायें पास करता जाता है। अव्वल भी आने के चांस रहते हैं, लेकिन वह जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। राहुल सीख रहे हैं यह गलत नहीं। वे समय के साथ राजनीति का क,ख,ग समझने की कोशिश करते हैं। जब प्रैक्टिकल की बात आती है तो वे थ्योरी पर बात शुरु करने लगते हैं।

हम उन्हें ‘कोमल राजकुमार’ इसलिए भी कहते हैं कि वे कठोर राजनीति के लिए नहीं बने हैं। उनकी राजनीति तो बिना लागलपेट वाली होनी चाहिए। सवाल यह है कि राजनीति सीधी और सपाट नहीं हो सकती।

कांग्रेस चाहें कुछ भी कहती रहे लेकिन गांधी परिवार का यह लाल भविष्य में सीखता रहेगा। एक अच्छा राजनीतिज्ञ बनने के लिए जो भरोसा चाहिए वह उनके पास हो भी, पर जमीनी हकीकत कुछ ओर बयान करती है।

-टाइम्स न्यूज़.