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विकास की गंगा की तलाश में तीर्थ गंगा किनारे वाला

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तीर्थ नगर ब्रजघाट आजादी के बाद से आजतक सरकारों के झूठे आश्वासनों से अपनी फटेहाली पर आंसू बहा रही है। सभी पार्टियों के नेता यहां आते तो हैं, लेकिन सिवाय आरती, कलावा बांधने, पूजा-अर्चना करने के कुछ नहीं करते। बीच—बीच में तीर्थ-स्थल के विकास के लिए नई-नई घोषणायें करने से भी बाज नहीं आते। लोगों का कहना है कि झूठे वादे करना नेताओं की फितरत बन गयी है। कई बार नेताओं और मंत्रियों को लोगों की नाराज़गी झेलनी पड़ जाती है।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने राजधानी लखनऊ को दिल्ली से जोड़ने के लिए ब्रजघाट गंगा पुल का शिलान्यास किया था। तब यहां नाम मात्र की आबादी हुआ करती थी और रेतीला जंगल था। नेहरु द्वारा ही यहां गढ़ चौपला रोडवेज बस स्टैंड का शिलान्यास भी किया गया था।

नेहरु के बाद किसी नेता ने यहां की सुध नहीं ली। सिर्फ वादे करते रहे, लेकिन अमलीजामा नहीं पहनाया। लोग आस लगाते रहे कि क्षेत्र का उद्धार होगा। मगर हुआ कुछ नहीं।

पूर्व में जब भाजपा की सरकार बनी तो रमेश चन्द तोमर यहां से सांसद बने। उन्होंने भी आश्वासन ही दिये। विकास के नाम पर दूसरे नेताओं की तरह वे भी छल करके चले गये। हालांकि कांग्रेस से सांसद सुरेन्द्र गोयल ने जरुर भागदौड़ कर यहां के लिए गढ़ रेलवे स्टेशन को आदर्श बनाया। उसी दौरान ब्रजघाट रेलवे स्टेशन का भी विकास हुआ।

बाद में तत्कालीन रेलमंत्री नितिश कुमार ने गढ़ से बुलंदशहर के लिए रेलवे लाइन बिछाने तथा गढ़ रेलवे स्टेशन को जंक्शन बनाये जाने का आश्वासन दिया जो महज आश्वासन ही रह गया।

लोकदल और भाजपा गठबंधन से लोकसभा पहुंचे देवेन्द्र नागपाल ने भी जीतने के बाद तीर्थ नगरी की ओर मुड़ कर नहीं देखा।

प्रदेश में भाजपा की सरकार में नगर विकास मंत्री लालजी टंडन ने हरिद्वार की तर्ज पर गढ़-ब्रजघाट का विकास कराने के लिए ताबड़तोड़ पत्थरों का शिलान्यास किया। हरिद्वार की तर्ज पर गंगा किनारे आरती का शुभारंभ किया। इसे विकास का असली जामा पहनाने के लिए गढ़, हापड़, पिलखुआ विकास प्राधिकरण का गठन किया। उसके बाद भाजपा सरकार का पतन हो गया।

बसपा  की मुखिया मायावती ने गंगा को ’एक नदी’ बताकर हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ किया। उन्होंने व उनके जनप्रतिनिधियों ने विकास नहीं अपना विकास कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।

प्रदेश में सपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेरठ में एक सभा में गढ़ तीर्थ नगरी सहित अनेक तीर्थों के विकास की बात कही। यह सुन यहां के लोग गदगद हो गए लेकिन सरकार ने विकास के नाम पर अभी तक एक भी ईंट नहीं लगाई है।

देश में मोदी के नेतृत्व में लोकसभा के चुनाव हुए लोगों में आस जगी कि देश के प्रधानमंत्री बने तो अच्छे दिन आएंगे। लोकसभा का चुनाव जीते भाजपा के कंवर सिंह तंवर ने गढ़ के विकास के लिए बड़े—बड़े वायदे किए। नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री की शपथ लेने के बाद कई हजार करोड़ रुपये अपने संसदीय क्षेत्र बनारस को दिए।

ना मोदी का ध्यान और न ही यहां से सांसद बने कंवर सिंह तंवर का ध्यान तीर्थ नगरी के विकास की ओर गया। जब से तंवर सांसद बने हैं, उनके दर्शन भी दुर्लभ हो गए हैं। क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता भी सांसद की कार्यशैली से रुष्ट हैं। वे कई बार प्रधानमंत्री से वाट्सएप एवं शिकायती पत्रों ने नाकारा सांसद की शिकायत कर चुके हैं।

पता नहीं यह देव स्थली और ऋषि मुनियों की तपो भूमि का विकास कब और कैसे होगा। इसके लिए कब और किस समय कोई भगीरथ जन्म लेगा जो विकासहीन तथा फटेहाल तीर्थ नगरी के आंसू पोंछ कर इसका विकास करेगा। तीर्थ नगरी के लोग आस लगाए बैठे हैं।

-गढ़मुक्तेश्वर से हरिप्रसाद गुप्ता