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योग को शामिल करें दिनचर्या में -रतन

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खाना-पीना, सोना—उठना इत्यादि दैनिक कार्यों में यदि हम योग को भी स्थान दें, तो निश्चित रूप से हमारा मन व शरीर पहले से ओर अधिक एक्टिव होकर, जीवन को उत्साह व उमंग से भर देगा। भारतीय संस्कृति की इस प्राचीन विधा की पूरी दुनिया कायल है व सैकड़ों देशों में लाखों-करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में यौगिक क्रियाओं के अभ्यास द्वारा अपने जीवन को उर्जावान बना रहे हैं। अतः हम सभी को बिना देरी किये इस भागदौड़ भरी दिनचर्या में से स्वयं के लिए कुछ पल निकालकर योग का अभ्यास करना चाहिए।
उक्त विचार लखनऊ से पधारे आर्ट ऑफ लिविंग इंटनेशनल के वरिष्ठ शिक्षक रतन अग्रवाल ने जिंदल हाउस, धनौरा में पत्रकारों से बात करते हुए व्यक्त किये।

बड़े ही सरल उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बिजली के पंखे की स्पीड नियंत्रित करने के लिए हम इलैक्ट्रोनिक रेग्युलेटर का प्रयोग कर सकते हैं पर लोगों के मस्तिष्क में उठने वाले विचारों की स्पीड को नियंत्रित करना बड़ा ही कठिन काम है। जिस पर सुदर्शन क्रिया योग सरीखे रेग्युलेटर द्वारा आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे समाज में बीमार पड़ने पर लोग शारीरिक अथवा मानसिक रोगों के ईलाज के लिए ही अस्पताल जाकर अपना उपचार कराते हैं, लेकिन हम अपने भीतर रोज़ाना होने वाली भावनात्मक पीड़ा (इमोशनल ट्रॉमा) को नजरंदाज करते रहते हैं। फलस्वरूप हम अपने प्राकृतिक स्वभाव जैसे मुस्कुराना, ठीक से सांस लेना इत्यादि छोटों-छोटी चीजों को भी भूलकर जीवन को एक बोझ की भांति ढोने लगते हैं। इसलिए हमें जरुरत है कि लोगों को उनके खुद के प्रति जागरूक कर उनकी खोई हुई मुस्कान लौटाने में सहायता करें।

जीवन जीने की कला कार्यक्रम के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा की इसके द्वारा न केवल शारीरिक, मानसिक बल्कि भावनात्मक रोगों से भी मुक्ति पाई जा सकती है। वर्तमान जीवन प्रणाली के द्वारा मनुष्य जीवन में नीरसता आती जा रही है। जिसमें जीवन जीने की कला जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उर्जा, उत्साह व उमंग पैदा किया जा सकता है।

कैमिकल बिजनेस के क्षेत्र में विख्यात कम्पनी पी.डी.साइंटिफिक के प्रमुख रतन अग्रवाल ने योग गुरु श्री श्री रविशंकर की तुलना भी एक कैमिकल साइंटिस्ट से करते हुए कहा कि उनके द्वारा ईजाद की गई सुदर्शन क्रिया को करने से संसार भर के अनेकों-अनेक लोगों के शरीर व मन के कैमिकल में भी सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं।

योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने के लिए उन्होंने श्री श्री रविशंकर, ओशो व स्वामी रामदेव आदि योग गुरुओं को धन्यवाद दिया।

जिंदल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डा. बी.एस.जिंदल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि धनौरा में जीवन जीने की कला (आर्ट ऑफ लिविंग) के अब तक 8 कोर्स आयोजित करना एक बहुत ही सराहनीय कार्य है। जिसके माध्यम से सैंकडों लोगों के जीवन में परिवर्तन आया है। उन्होंने जिंदल परिवार को एक आदर्श परिवार बताते हुए कहा की भारतीय सभ्यता के प्रमुख स्तम्भ योग और आयुर्वेद दोनों को इस परिवार के द्वारा आम लोगों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है।

इस अवसर पर उन्होंने जानकारी दी कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शीघ्र ही क्षेत्र के लोगों के लिए जिंदल हाउस के द्वारा सुदर्शन क्रिया योग शिविर (आर्ट ऑफ लिविंग) का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर महिपाल सिंह, मंजू, डा. राधा, डा. दिलबाग, कमलेश, रवि, वीरेन्द्र, डा. संदीप, सरदार जसपाल सिंह, दीपिका, अमायरा, प्रदीप, डा. कृष्णदेव, डा. तान्या, गौरी, प्रियंका चौहान आदि उपस्थित थे।

-टाइम्स न्यूज़ मंडी धनौरा.