कहां थे हमारे भविष्यवक्ता?


नेपाल में आये विनाशकारी भूकंप ने एक प्राकृतिक सौन्दर्य से सराबोर शांतिप्रिय देश को तहस-नहस कर मरघट में तब्दील करके रख दिया जिसका कुप्रभाव भारत के भी हिस्से में आया। उससे भारी जानमाल के क्षति का न तो सही आकलन अभी किया जा सकता है और न ही उसे पूरा किया जा सकता है। फिर भी हर भारतवासी इस दुख की घड़ी में अपने नेपाली भाइयों के साथ है। हमसे जो बन पड़ा है या जो हम कर सकेंगे वह बराबर करेंगे। हमारी सरकार ने पूरे सहयोग के हाथ बढ़ाये हैं। यह एक ऐसी त्रासदी है जिससे बचना अभी तक इस वैज्ञानिक प्रगति के युग में भी संभव नहीं। यह पूर्णरुपेण प्राकृतिक आपदा है।

हमारे देश में ऐसे तिलकधारियों और पोंगापंथियों की भरमार है जो भविष्यवक्ता होने का स्वांग रचकर लोगों से धन ऐंठते रहते हैं। टीवी चैनलों पर भी इस तरह के कथित भविष्यवक्ताओं की लंबी लाइन है। सूर्याेदय होते ही आप को दिन में घटित होने वाली घटनाओं तक की दशा और दिशा तक का हाल बताने का ये दावा करते हैं। जिन्हें अपने भविष्य के एक पल का आभास नहीं वे इहलोक से परलोक तक का हाल बताने को तैयार रहते हैं। इनपर भरोसा करने वालों की भी खासी तादाद है जिसके सहारे ये दुकानें खूब फल-फूल रही हैं। इनके झूठ और पाखंड की पोल उत्तराखंड में घटी त्रासदी, कश्मीर के सैलाब तथा अब नेपाल के जलजले से खुल गयी।

उत्तराखंड के चार धाम और दूसरे तीर्थ स्थलों पर जाने वाले अधिकांश लोग अपना भविष्य और शुभ मुहुर्त ऐसे ही भविष्यवक्ताओं से पूछ कर घर से चले थे। इनमें सैकड़ों लोग ऐसे भी थे जो स्वयं भविष्य बताने का धंधा करते थे। साथ ही वे भविष्य की मंगलकामनाओं और आकक्षाओं की याचना को तीर्थयात्रा को गये थे। हजारों लोगों के साथ वहां क्या गुजरी, सबको पता है। अनेक भविष्यवक्ता भी पहाडों में दफन हो गये या जलधारा में बह गये। जीवित बचे लोगों पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा। एक भी भविष्यवक्ता की बात ठीक नहीं निकली। किसी भी भविष्यवक्ता को नहीं पता था कि पहाड़ पर यात्रियों के साथ क्या होने वाला है?

देश के किसी भी कोने में बैठे, बड़े से बड़े एक भी भविष्यवक्ता ने यह नहीं बताया कि उत्तराखंड में प्रलय आने वाली है। किसी टीवी चैनल, किसी समाचार पत्र या पत्रिका में भी किसी ने इस विराट प्राकृतिक आपदा का अंशमात्र भी जिक्र तक नहीं किया। बल्कि भविष्यवक्ताओं की काफी संख्या पहाड़ों पर सदियों से लोगों के भविष्य के बारे में बताते रहे हैं। ऐसे लोगों को अपने ही भविष्य का पता न था। वे भी इस बाढ़ में विनाश को प्राप्त हो गये। अब नेपाल में आयी विपदा का भी किसी भविष्यवक्ता और ज्योतिष को महाविज्ञान बताने वाले ज्योतिषाचार्यों को आभास तक न हुआ। यदि ऐसा होता तो वे पहले ही शोर मचा देते। पोंगा पंथी और ढोंगी भविष्यवक्ताओं की हकीकत को अब तो समझ लेना चाहिए। इनसे पूछा जाना चाहिए इस तरह होने वाली खतरनाक घटनाआं का उन्हें क्यों पता नहीं चला? कहां चला गया था तुम्हारा ज्योतिष-विज्ञान?

--जी.एस.चाहल.

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