Header Ads

अखिलेश यादव के बदलते सुर या चुनाव की आहट

अखिलेश-यादव-और-नरेन्द्र-मोदी-की-राजनीति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सुर समय-समय पर बदलते रहते हैं। कभी वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर आलोचना करते हैं। उनके विदेश दौरों पर खूब चुटकी लेते हैं। अब जबकि अखिलेश यादव विदेश घूमकर आये तो उनके सुर बिल्कुल जुदा हो गये। उन्होंने नरेन्द्र मोदी की विदेश यात्रा को उचित ठहराया।

अखिलेश यादव ने 21 मई से 26 मई तक विदेश दौरा किया था। वे फ्रांस गये थे। उनकी पत्नि कन्नौज से सांसद डिंपल यादव भी उनके साथ गयी थीं। अखिलेश यादव का मकसद था इत्र के कारोबार को बढ़ावा देना। साथ ही वे विदेश जाकर नई तकनीक से भी रुबरु हुए।

एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेश के निवेश से देश में बेरोजगारी कम होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विदेश दौरों को उन्होंने देश हित में बताया। शायद वे खुद फ्रांस गये थे तो उनसे भी खूब सवाल-जबाव हो सकते थे।

अखिलेश राजनीति में मंझ चुके हैं। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उन्होंने राजनीतिक तौर पर खुद को और विकसित कर लिया है। उनकी भाषा और शब्दों के चुनाव में पहले से अंतर आया है। यह अभी भी जारी है।

नरेन्द्र मोदी जिस अभियान का प्रचार करते हैं, अखिलेश यादव कुछ समय बाद उसके जैसे अभियान या उससे कारगर अभियान लेकर आ जाते हैं। अखिलेश पर प्रधानमंत्री की नकल के आरोप भी लगाये जाते हैं।

पीएम ‘मेक इन इंडिया’ का प्रचार करते हैं तो मुख्यमंत्री ‘मेक इन यूपी’ का।

जर्मनी में भी ‘मेक इन यूपी’ का खूब प्रचार किया गया था। पेपरलैस आॅफिस, स्वच्छता कार्यक्रम आदि अभियानों पर अखिलेश ने काम किया। वो अलग बात है कि योजनाओं का बंटाधार भी साथ-साथ होता रहा।

देखा जाये तो यूपी के सीएम भारत के पीएम से होड़ करने से पीछे नहीं रहते।

सपा के कुछ अनुयायी कह रहे हैं कि सीएम यदि पीएम होते तो कितना करते। जबकि हकीकत यह है कि चुनाव की आहट के बाद राजनीति में चौंकन्ना होने की आदत पुरानी हो चली है।
मौजूदा समय में राजनीति का स्वरुप बदल गया है। यहां बयान और व्यवहार भी तेजी से बदल रहे हैं।

-टाइम्स न्यूज लखनऊ.