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किसानों पर सूखे का कहर

भयंकर सूखा, ऊपर से बिजली की दिक्कत किसान फिर परेशान है। किसान संगठन बार-बार बिजलीघरों पर धरने प्रदर्शन कर पर्याप्त बिजली की मांग कर रहे हैं लेकिन बिजली की दिक्कत कम होने के बजाय बढ़ रही है।

इस समय दिन में जंगल में आग बरसने से फसलों का बुरा हाल है। अप्रैल तक किसान अतिवृष्टि से परेशान था जबकि आज सूखे से लड़ते-लड़ते उसका बुरा हाल है। गन्ने की कीमत न मिलने से गन्ने का रकबा घट गया है। मैंथा पहले ही उचित मूल्य के अभाव में नहीं बोया गया। हरा-चारा, धान की तैयारी और गन्ने की बची फसल को इस समय सिंचाई की जरुरत है। बिजली पर्याप्त न आने के कारण ये सभी फसलें सूख रही हैं। बिजली के इंतजार में बैठे किसान भी खेतों में सूख रहे हैं।

इंजन से सिंचाई करने पर औसत नहीं आता। अधिकांश सवमर्सिवल पम्प हैं जिन्हें बिजली न आने पर जेनरेटर से ही चलाया जा सकता है जिसका खर्च दौ सौ रुपये घंटा से भी अधिक पड़ता है। इससे एक सिंचाई में ही किसान का दम निकल जायेगा।

पहले ही बरबादी का दंश झेल रहे  किसानों को बचाने के लिए शहरी क्षेत्रों की बिजली कम करके कृषि क्षेत्र को दी जानी जरुरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह किसानों पर एक और बज्रपात होगा।

भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि शीघ्र ही किसानों को बीस घंटे प्रतिदिन बिजली उपलब्ध करायी जाये। मांग करने वालों में डूंगर सिंह, स. जरनैल सिंह, भोला सिंह, बाबू सिंह, राजपाल सिंह, नन्हें आदि नाम शामिल हैं।

'सूखे से किसान दुखी’

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौ. विजयपाल सिंह ने केन्द्र और राज्य दोनों सरकारों को किसान विरोधी ठहराते हुए कहा कि दोनों सरकारों में से किसी को भी किसानों की परवाह नहीं। बिजली जरुरत के मुताबिक मिले तभी किसान को राहत मिल सकती है। इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। पहले वर्षा और अब सूखे से किसान दुखी हैं।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.