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किसानों का दर्द समझने वाला कोई नहीं

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किसानों का दर्द समझने वाला कोई नहीं है। चाहें केन्द्र की सरकार हो या उत्तर प्रदेश की सरकार, किसी के पास वह दवा नहीं जो किसानों के जख्मों पर थोड़ा भी मरहम लगा सके।

हाल में पंचायती राज राज्यमंत्री कमाल अख्तर और नौगांवा सादात विधायक अशफाक अली खां ने हसनपुर में किसानों को राहत चैक वितरित किये। किसान जानते हैं कि इस राशि से उनका भला नहीं हो सकता। यह एक तरह से किसानों के साथ मजाक भी है। उन्हें किसी भी सरकार में वाजिब हक नहीं मिला।

किसान की हालत में इससे कुछ भी सुधार नहीं होने वाला। गन्ने का मूल्य उन्हें मिला नहीं। आफत की बारिश ने उनकी फसलें चौपट कर दीं। उन्हें आत्महत्यायें तक करने को मजबूर होना पड़ा। मगर सरकारों पर असर नहीं हुआ।

आर्थिक सहायता के नाम पर उन्हें कुछ सौ या उससे थोड़े अधिक रुपये के चैक थमा दिये गये। लंबी-चौड़ी बातें कर प्रचार किया गया कि इतने हजार करोड़ रुपये बांट दिये गये। हर किसी को मालूम है कि एक किसान के हिस्से में कितना धन आयेगा। कुछ बिचौलिये घुस गये। कहीं अधिकारियों ने बंदरबांट की। कुल मिलाकर जो दो-चार किसानों तक पहुंचने थे वे भी ठीक ढंग से नहीं पहुंच सके।

भाजपा के नेता तो मानो किसानों से दूरी बना चुके हैं। वे केवल अपनी बात कहकर वहां से चलते बनते हैं।

‘प्रदेश सरकार समझती है किसानों का दर्द’

चैक वितरण कार्यक्रम के दौरान कमाल अख्तर ने कहा कि समाजवादी सरकार किसानों का दर्द समझती है। उसे किसानों की फिक्र है। उनके अनुसार प्रदेश की सरकार ने दो हजार पांच सौ करोड़ रुपये किसानों के लिए दिये हैं।

कमाल अख्तर ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने अच्छे दिन का वादा कर लोगों को ठगा। उन्हें सपना दिखाया गया जो कभी पूरा नहीं हो सकता।

नौगांवा सादात विधायक अशफाक खां ने भी केन्द्र सरकार पर कहा कि वह अपनी नीतियों से पीछे हट रही है। उसकी नीयत साफ नहीं है।

-टाइम्स न्यूज़ हसनपुर.