गजरौला नगर पंचायत में लाखों का पम्प घोटाला

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नगर पंचायत में कई सौ हैंड पम्प बीते सालों में नगर पंचायत की ओर से लगाये गये हैं। यहां कम से कम एक सौ साठ से एक सौ अस्सी फीट गहरे बोरिंग होने चाहिएं। इतनी ही गहराई के लगभग मानक नगर पंचायत का भी है। परंतु कहीं भी एक सौ बीस फीट से अधिक पाइप नहीं डाला गया। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यहां लगे किसी भी पंप को उखाड़कर मिल जायेगा। इन नलों में प्रत्येक नल में 40 से 50 फीट तक पाइप की चोरी की गयी है। इस पाइप का मूल्य बाजार में तीन हजार से अधिक का है। यदि यहां सौ नलों के केवल पाइप का हिसाब ही लगाया जाये तो तीन लाख रु. पाइप से ही हड़प लिये गये। दूसरे सामानों की भी जांच की जाये तो ठीक पता चल जायेगा। बहुत सी जगह नलों का चबूतरा ही नहीं बनाया गया। कुछ जगह लोगों से हजार या पांच सौ रुपये भी वसूले गये हैं। वार्ड दस में टाइम्स आफिस के निकट लगे हैंड पंप में 120 फीट पाइप मुश्किल से डाला गया है।

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नगर पंचायत निर्माण कार्यों और खरीद आदि के अधिकांश विज्ञापन समाचार पत्रों के उन संस्करणों में निकलवाते हैं जो गजरौला आते ही नहीं। नगर पंचायत की फाइलों में लगी समाचार पत्रों की प्रतियां इसका सबूत हैं। पिछली जांचों के दौरान इ.ओ. ने इस तरह की शिकायतों पर जांच कर्ताओं को जागरण या उस अखबार की प्रति दिखा दी जिस अखबार में विज्ञापन छपे थे। जांचकर्ताओं ने यह जानबूझकर या अनजाने में ओके कर दिया कि इस नाम का अखबार गजरौला आता है। देखना यह चाहिए कि उस अखबार के जिस संस्करण में विज्ञापन छपा वह किस जिले में जाता है? सवाल अखबार का नहीं बल्कि संस्करण का है। इस तरह की लीपापोती की जांच भी यहां अधिकांश होती रही हैं।

इन सबका विशेषज्ञ नगर पंचायत में 13 वर्षों से तैनात एक अधिकारी है। उसकी तमाम संपत्ति आदि की जांच की जाये तो यहां हैरतअंगेज खुलासे होंगे।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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