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दो बूंद दूध का दर्द

slaughter of cow in amroha including buffalo

आज स्थिति ऐसी है कि केवल गरीब ही नहीं बल्कि मध्यम दरजे के नागरिक भी दूध के लिए तरस गये हैं। देसी घी के विकल्प के रुप में खाद्य तेलों या वनस्पति घी का सेवन बढ़ने के कारण इनके दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।

हम सभी आसानी से कह देते हें कि खाद्य महंगायी पर सरकार लगाम नहीं लगा पा रही। उसकी नीतियां महंगायी बढ़ा रही हैं लेकिन सरकार से अधिक जनता महंगायी बढ़ाने को जिम्मेदार है। यह सभी जानते हैं कि हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि तेजी पर है। हम सवा करोड़ हो गये। देश में दुग्ध देने वाले पशु उस अनुपात में नहीं बढ़े, बल्कि उनकी संख्या बीते कई वर्षों से घटी है।

देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अधिकांश दूध हमें भैंसों के माध्यम से प्राप्त होता है। दूसरे स्थान पर गाये हैं। पिछले एक दशक से दुधारु भैंसों का वध मांस के लिए तेजी से बढ़ा है। नये-नये कसाईघर खोले जा रहे हैं। पुरानी पशु वध-शालाओं की वध क्षमता बढ़ाई जा रही है। विधायक और सांसद भी इस तरह के कारखाने लगा रहे हैं। यदि इस कार्य को नहीं रोका गया तो बहुत जल्दी भैंसों के दर्शन दुर्लभ हो जायेंगे। देश में ही एक वर्ग विशेष में भैंस के मांस का बहुत प्रचलन है। इसी के साथ बड़े पैमाने पर उसे अरब देशों को निर्यात किये जाने से इस दुधारु पशु का वध बढ़ गया है। यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है लेकिन इसके खिलाफ जनता के किसी कोने से भी आवाज नहीं उठ पा रही।

यह और भी चिंताजनक बात है कि भैंसों की वध-शालाओं में पूर्ण प्रतिबंधित दुधारु पशु गायों का भी वध किया जा रहा है।

मुरादाबाद मंडल में गौ वध चोरी छिपे जारी है। हालत यह है कि घरों तथा जंगलों के बीच यह घिनौना काम जारी है। कई बार पुलिस ने रंगे हाथों इस तरह के अपराध में लिप्त लोगों को पकड़ कर जेल भी भेजा है। भूसे की तरह ट्रकों में भरकर गायों को वध के लिए बाहर से यहां लाया जाता है। कई बार पुलिस ने इस तरह के ट्रकों को पकड़ा है, लेकिन कई पुलिसकर्मी गौ हत्यारों से सांठ-गांठ कर चंद सफेदपोश चेहरों के आशीर्वाद से यह अपराध कर रहे हैं।

दूध का गिरता उत्पादन तथा उसकी बढ़ती मांग ने उसकी कीमतों में तो वृद्धि की ही है, उसी के साथ इनसे मिलावट खोरी भी तेजी से बढ़ी है.

दुधारु पशुओं के अंधाधुंध वध से दूध की देश में लगातार कमी हो रही है। बढ़ती आबादी और घटते पशुओं की रफ्तार यही रही तो हमें न तो दूध नसीब होगा और न ही दूध से बने दूसरे पदार्थ। दूध का गिरता उत्पादन तथा उसकी बढ़ती मांग ने उसकी कीमतों में तो वृद्धि की ही है, उसी के साथ इनसे मिलावट खोरी भी तेजी से बढ़ी है। नकली दूध, नकली खोया और उससे बनी घटिया मिठाईयां हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी बन गयी हैं। न जाने कितने गरीब आयेदिन इस तरह के खाद्य पदार्थों के सेवन से गंभीर बीमारियों के शिकार होकर अकाल मौत के मुंह में समा रहे हैं।

पूरे मुरादाबाद मंडल में आज नकली दूध का काला कारोबार तेजी से फैल रहा है। कई लोग इस काले धंधे से रातों रात कुबेर बन गये। इस तरह की सभी समस्याओं की जड़ दुधारु पशुओं का असीमित वध किया जाना है। जनता अच्छी तरह जानती है लेकिन फिर भी खामोश है। बिना जनांदोलन अथवा जन जागृति से इस समस्या का निदान नहीं होने वाला। खाद्य पदार्थों की महंगायी का रोना रोने वालों को पशु वध के विरोध में एकजुट होकर आगे आना होगा। साथ ही बढ़ती जनसंख्या को भी रोकना होगा।

-गजरौला टाइम्स के लिए हरमिंदर सिंह.

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