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मिलावटी पशु आहार से दूध क्षमता पर असर

cow fodder picture from india

अमरोहा जिले में खल, चोकर और अन्य पशु खाद्य सामग्री में कई ऐसे पदार्थ मिलाये जा रहे हैं जिनका असर दुधारु पशुओं पर पड़ रहा है। उनकी दूध देने की क्षमता कम होती जा रही है। इससे दुग्ध उत्पादक काफी चिंतित हैं। यहां तक कि पशु चारे में मिलावटखोरी करने में प्रतिष्ठित आहार निर्माता भी पीछे नहीं हैं।

जिले भर में बिक रहे पशु चारे में जमकर मिलावटखोरी हो रही है। खल-चोकर और अन्य पशु खाद्य सामग्री में भारी मिलावट की जा रही है। अलसी की मिलावट रहित शुद्ध खल के दर्शन ही दुर्लभ हो गये हैं। उसमें चिकनी मिट्टी तक मिली पायी जा रही है। इसी के साथ कीमतों में लगातार उछाल जारी है।

एक प्रकार से पशु पालकों को पशु चारा निर्माता और व्यापारी चारों ओर से लूट रहे हैं। इससे दुग्ध उत्पादक बहुत ही परेशान हैं। बाजार से खरीदे इस राशन से दुधारु गाय-भैंसों को आंशिक लाभ ही मिल रहा है। जिले में बन रहे नामचीन कंपनी के पशु आहार भी दुधारु पशुओं को रास नहीं आ रहा। इसमें सस्ते और बेकार पदार्थ मिलाकर दुग्ध उत्पादकों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। पशु चिकित्सकों से सांठ-गांठ करके ऐसी कंपनियों के मालिक पशु मेलों और कृषक गोष्ठियों में अपने पशु आहार की सिफारिश करा लेते हैं।

अमरोहा, गजरौला, मंडी धनौरा, हसनपुर, जोया तथा नौगावां सादात में भारी पैमाने पर मिलावटी पशु आहार ऊंची कीमतों पर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। पशु पालक परेशान हैं कि पूरी मात्रा में रातब देने के बावजूद पशु पूरा दूध नहीं दे रहे। उनका स्वास्थ्य भी बेहतर नहीं हो पा रहा।

खल, चोकर तथा अन्य पशु आहार का मूल्य हर माह बढ़ता जा रहा है, लेकिन दूध का मूल्य साल भर में भी नाम मात्र का ही बढ़ता है। ऐसेे में दुग्ध उत्पादकों का बुरा हाल है। जिन लोगों के पास पर्याप्त हरा चारा है, वे ही इस काम में सफल हैं। लेकिन ऐसे लोग बहुत कम हैं।

-गजरौला टाइम्स के लिए हरमिंदर सिंह.


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