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नोबल पब्लिक स्कूल संचालकों को विवादों में फंसे रहने की आदत बन गयी है। ये आरोप छात्रों के अभिभावकों द्वारा यूं ही नहीं लगाये जाते बल्कि कई बार हकीकत सामने आ चुकी है। छात्रों के साथ मारपीट और अवैध आर्थिक वसूली के मामले कई बार प्रकाश में आ चुके। जिला स्तर तक शिकायतें और प्रमाण दिये गये हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत के कारण स्कूल संचालकों का कुछ नहीं बिगड़ता और वे अपनी आदत बदलने की जरुरत ही नहीं महसूस करते।

मंडी धनौरा के एक छात्र के साथ की मारपीट में संचालक फंस गये थे लेकिन नगर के कुछ संभ्रांत लोगों के हाथ-पैर जोड़कर अभिभावकों से क्षमा मांगकर मामला शांत कराया था। उसके बाद भी कई अभिभावकों ने प्रधानाचार्या तथा संचालकों पर आर्थिक अपराध के आरोप लगाये थे।

नया मामला नगर के अतरपुरा मोहल्ले की छात्राओं से टीसी देने के नाम पर पांच-पांच सौ रुपये मांगने का है। यहां के निवासी सुरेन्द्र कुमार गोयल और अमरनाथ गुप्ता ने विवश होकर जिलाधिकारी से शिकायत की कि उनकी बेटियों की टीसी देने के लिए पांच-पांच सौ रुपये मांगे जा रहे हैं। न देने पर टीसी नहीं दी जा रही। रसीद देने से भी इंकार किया जा रहा है।

डीएम ने डीएसओ को जांच सौंप दी। डीएसओ कार्यालय ने स्कूल से संपर्क साधा तो प्रधानाचार्य ने कह दिया कि टीसी दे देंगे। अभिभावक स्कूल आ जायें। इस व्यवहार से दोनों अभिभावक क्षुब्ध हैं। इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से स्कूल संचालकों की मिलीभगत है।

सभी शिक्षा-सत्रों में अभिभावकों और स्कूल संचालकों में विवाद के मामले होना आम बात है। गजरौला बस्ती के अभिभावकों का विवाद भी लंबा चला था।

ओमवीर सिंह के बच्चों से एक भी दिन स्कूल में जाये बिना छह माह की फीस वसूल की गयी थी।

मंडी धनौरा के एक छात्र को स्कूल संचालक के बेटे ने बुरी तरह मारा था, जिसकी एफआइआर भी की गयी थी।

इस स्कूल का विवादों से अटूट नाता है तथा अधिकारियों से भी संचालकों का मजबूत गठबंधन है। हर प्रकरण दबना इस बात का प्रमाण है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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