Header Ads

बूढ़े शेर का रास्ता रोकने को तैयार सिंह शावक

chanderpal-singh-amroha

समाजवादी पार्टी की ओर से जिले के सबसे पुराने नेता चौ. चन्द्रपाल सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के दावेदार के रुप में सामने लाया जा रहा है। यह यहां से सभी बड़े पदों पर अल्पसंख्यकों का बहुमत होने के कारण बहुसंख्यकों को सपा से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।

यह सभी जानते हैं कि पूर्व मंत्री चौ. चन्द्रपाल सिंह का लंबे समय तक यहां की राजनीति पर दबदबा रहा है। वे यहां से सांसद भी रहे हैं तथा गन्ना समितियों के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। इसी के साथ कई महत्वपूर्ण पदों पर भी वे रहे। इसके बावजूद वे ईमानदार नेता माने जाते हैं और लंबे राजनैतिक सफर में उनपर कोई दाग नहीं लगा। यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। दूसरी ओर आज के राजनैतिक माहौल में किसी भी तरह फिट नहीं बैठते। जब भाई-भतीजावाद, जाति और विरादरीवाद हावी हो चुके हों तो, चन्द्रपाल सिंह जैसे नेता का इस राजनीति में कोई स्थान नहीं।

chanderpal-jaat-kafurpur-dharna
कई साल पूर्व काफूरपुर के जाट आन्दोलन में चौ. चंद्रपाल सिंह भाषण देते हुए.

चन्द्रपाल सिंह से जिले के अधिकांश जाट, विशेषकर नवयुवक खुश नहीं हैं। उसका सबसे बड़ा कारण है कि चन्द्रपाल सिंह धर्मनिरपेक्ष और जातिनिरपेक्ष व्यक्ति रहे हैं। उनकी इस विचारधारा ने यहां की जाट राजनीति को सबसे गहरी चोट पहुंचायी है। पिछले ढाई दशक से जबसे राज्य में कभी बसपा और कभी सपा की सरकार बनी, तभी से चन्द्रपाल सिंह जाटों और किसानों की पार्टी कही जाने वाली रालोद से किनारा कर सपा के साथ हो लिए जहां जाटों को कोई स्थान नहीं था। सपा यादव तथा मुस्लिम गठजोड़ को प्रमुखता देती रही है और बसपा दलित ब्राह्मण गठजोड़ तक जा पहुंची।

चौ. चन्द्रपाल सिंह लंबे समय से जाटों द्वारा प्रदत्त शक्ति का लाभ जाट विरोधी सपा को प्रदान करते आ रहे हैं जो उन्हें जाट हितों के लिए प्रदान की थी। चौ. चन्द्रपाल सिंह के इस कदम ने जाटों में विभाजन का बीज रोप दिया। जिसके कारण पूरे जनपद में एक बड़ा वोट बैंक होने के बावजूद एक भी जाट आज विधायक की कुरसी तक नहीं पहुंच पा रहा।

चौ. चरण सिंह और जाटों के नाम पर दशकों तक सत्ता का आनंद लेने वाले इस चौधरी ने चौ. अजीत सिंह और जिले की राजनीति में उभरते तत्कालीन जाट नवयुवकों का सहयोग करने के बजाय उनका मार्ग अवरुद्ध करने का ही काम किया। चाहें भाकियू का आंदोलन हो या रालोद की नीतियां, चौ. ने उनके समर्थन के बजाय उन्हें कमजोर करने वाली समाजवादी पार्टी का ही सहयोग किया।

chanderpal-kamal-akhtar
चौ. चंद्रपाल सिंह बीते लोकसभा चुनाव में हुमैरा अख्तर को परचा भरवाने के दौरान भी मौजूद रहे.

चन्द्रपाल सिंह की आज सपा में जो हैसीयत है उसका पता तभी चल गया था जब वे अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा सड़क पर फेंक दिये गये थे।

चौधरी साहब आज देख रहे होंगे कि इस समय जिले के सैकड़ों जाट नवयुवक राजनीति में हैं तथा वे आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। वे आगे बढ़े भी हैं। उनमें क्षमता है, वे अपने-अपने स्तर से अलग-अलग दलों में जा रहे हैं। आज के राजनैतिक मौसम को वे भांप चुके।

चन्द्रपाल सिंह को चाहिए कि वे उम्र के अंतिम पड़ाव में राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को काबू में कर भगवत भजन करें और राजनैतिक पटल पर उभर रहे जाट नवयुवकों के रास्ते से हट जायें। उन नेताओं से भी सावधान रहें जो अपनी राजनीतिक रोटियां सेकनें के लिए उनके बूढ़े कंधों पर बन्दूक रखकर विरोधियों पर निशाना साधना चाहते हैं। जाट बहुमत इस बूढ़े शेर पर और भरोसा नहीं करने वाला। जब सिंह शावक जवान होकर गुफा से बाहर आ चुके तो दंत विहीन, बूढ़े सिंह को मोरचे पर लगाना जानबूझकर की गयी गुस्ताखी होगी।

जिला पंचायत चुनाव 2015 से जुड़ी सभी ख़बरें पढ़ें >>

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

गजरौला टाइम्स के ताज़ा अपडेट प्राप्त करने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें.