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गजरौला पालिकाध्यक्ष बनने वालों के कान खड़े हुए

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जहां पूरे उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की सरगरमी तेजी पर है, वहीं गजरौला के पालिका बनने से पालिका अध्यक्ष बनने की ख्वाहिश पाले बैठे लोगों के भी कान खड़े हो गये हैं। इसी के साथ पालिका सभासद का चुनाव लड़ने वाले लोगों ने भी जमीन सूंघनी शुरु कर दी है। इनमें कई लोग आरक्षण नीति के कारण जिला पंचायत चुनाव से बाहर होने के कारण पालिका चुनाव में किस्मत आजमाने पर भी विचार में लग गये हैं। कुछ लोग यह भी सोच रहे हैं कि नगर पंचायत बोर्ड समयपूर्व भंग होना चाहिए, हालांकि ऐसा होने की उम्मीद नहीं है।

आम राय है कि पालिका चुनाव का समय आने पर गजरौला आरक्षित के बजाय सामान्य पालिका की श्रेणी में होगा। ऐसे में कुछ लोगों का तर्क है कि बी.सी. आरक्षण में गजरौला आना चाहिए। इन लोगों का तर्क है कि अभी तक यह बी.सी. में नहीं आया। इसलिए बी.सी. आरक्षित की संभावना भी है।

यह बाद की बातें हैं, फिलहाल यहां से कई लोग पालिका अध्यक्ष बनने की अभिलाषा में गणित लगाने लगे हैं। इनमें ज्ञान भारती इंटर कालेज के प्रबंधक तथा पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रोहताश शर्मा, जिला पंचायत सदस्य वीरेन्द्र सिंह, साबिर अली, उमर फारुख सैफी तथा गजेन्द्र सिंह चाहल समेत दर्जनभर से अधिक लोगों के नाम शामिल हैं।

मौजूदा नगर पंचायत अध्यक्ष हरपाल सिंह पहले विधानसभा चुनाव की तैयारी करेंगे। पिछली बार की तरह यदि चुनाव हार गये तो मंडी धनौरा पालिका का चुनाव लड़ेंगे। वे वहां नया मकान बनवा रहे हैं तथा धनौरा पालिका एस.सी. में जाने की आशा से वे गजरौला के बजाय वहीं चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। वे जनरल के बजाय रिर्जव सीट पसंद करते हैं।

पालिका सभासद का चुनाव लड़ने वालों की लंबी सूची है। यहां अब 18 से 25 वार्ड बन गये, जिनका परिसीमन पंचायत चुनावों के बाद शुरु होगा। चुनाव में व्यस्तता के कारण अभी यह संभव नहीं है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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