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नगर पंचायत में बिना सोचे-समझे सड़कों के निर्माण पर धन बरबाद किया जा रहा है। न तो यह देखा जा रहा कि जिस स्थान पर सड़कें बनाई जा रही हैं, वहां वे एक-दो माह तक टिकेंगी भी या नहीं और यह भी नहीं ध्यान नहीं दिया जा रहा कि उनकी निर्माण स्थल पर जरुरत है भी या नहीं। केवल एक ही उद्देश्य रह गया है कि कमीशनखोरी और अधोमानक सामग्री का इस्तेमाल कर अधिक से अधिक धन कमाया जाये।

हाल ही में अतरपुरा में स. हरि सिंह ढिल्लो के मकान के सामने से पूरब दिशा में चौपला मंदिर की ओर नगर पंचायत ने इंटरलॉकिंग मार्ग बनवाया था। एक ओर इसके आबादी है तथा दूसरी ओर गहरा तालाबनुमा खेत है।

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इंटरलॉकिंग निर्माण के दौरान तालाब की ओर कोई दीवार आदि नहीं बनवाई गयी। यहां रेतीली मिट्टी है। मामूली बरसात से ही तालाब की ओर मिट्टी कटकर बहने लगी। ऐसे में नीचे से मिट्टी निकलते ही सड़क का टूटना जरुरी था, सो वही हुआ। लाखों रुपयों में महीनों पूर्व बनी सड़क समाप्त हुई। अब दोबारा टेंडर की तैयारी है। बताया जा रहा है कि इस बार पहले से बड़ा एस्टीमेट तैयार किया जायेगा। बहाना पहले से मजबूत सड़क का होगा।

यहां यह अकेला मामला नहीं है। कई नाले इसी तरह दोबारा बनाये गये हैं। पुलियां आयेदिन धराशायी हो रही हैं। कई जगह सड़कों की जरुरत पर भी नहीं बन रहीं जबकि कई जगह खेतों में सड़कें बिछायी जा रही हैं। सब कमीशन का खेल है।

मजेदार बात यह है कि चेयरमेन हरपाल सिंह इतना कुछ करने के बाद मंडी धनौरा से विधानसभा का एक बार फिर चुनाव लड़ना चाहते हैं। क्या गजरौला के आंकड़ें उन्हें चुनावी दरिया में डुबोने का काम नहीं करेंगे?

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-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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