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नगर पंचायत के मनमाने निर्माण ने बढ़ाई लोगों की दिक्कतें

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एक ओर नगर पंचायत आबादी रहित प्लांटों और जलभराव से दुखी लोगों ने चेयरमेन को घेरा जबकि कई जरुरतमंद आबादी की नालियों और रास्तों की हालत बद से बदस्तर है। हाल ही में जहां वार्ड एक में काम न होने पर वहां के सभासद ने चेयरमेन के सामने अपने शरीर को आग लगाने का प्रयास कर विरोध जताया, वहीं जलभराव से परेशान बसंत विहार के बाशिंदों ने चेयरमेन का घेराव भी किया। विरोध करने वालों में वार्ड एक के सभासद से दूसरे लोगों तक अधिकांश चेयरमेन के दलित सजातीय लोग ही हैं। इसी से पता चलता है कि नगर में दूसरे लोगों के साथ ही उनके अपने भी नाराज हैं।

पिछले सप्ताह वार्ड एक के सभासद राजीव कुमार चेयरमेन हरपाल सिंह के कृष्णा नगर स्थित आवास पर आये और अपने वार्ड में काम न कराने तथा विकास की अनदेखी पर चेयरमेन से शिकायत करने लगे। वे बहुत गुस्से और तनाव में थे। उस समय कई सभासद भी वहां मौजूद थे, जबतक सभासद को कब्जे में किया और माचिस छीनकर फेंक दी। आनन-फानन में सभासद के कपड़े धुलवाये उसे स्नान कराया, चेयरमेन ने दूसरे कपड़े पहनाये, साथ ही लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कराने का वादा किया। साथ ही इस घटना को अखबार  वालों से छुपाने का भी प्रयास किया गया लेकिन कुछ सभासदों ने घटना की पूरी जानकारी अखबार वालों को दी।

इसी के साथ दूसरी घटना बसंत विहार मोहल्ले की है। यहां की सड़कें और नालों का बुरा हाल है। साथ ही यहां एक खाली भू-भाग पर मामूली बरसात से ही जलभराव हो जाता है। यहां पानी में खड़े बिजली के खम्भों में करेंट आने से लगातार दुघर्टनाओं का खतरा बना रहता है। अव्यवस्थित सड़कें तथा नाली निर्माण के कारण मोहल्ले में नव निर्माण के साथ ही नाली-सड़कों के निर्माण पर भारी-भरकम रकम खर्च की जा चुकी। सड़कें और नाली-नालियों के निर्माण का मकसद लोगों को सुविधा उपलब्ध कराना नहीं बल्कि कमीशनखोरी के सहारे धन कमाना है। यही कारण है कि बनी सड़कें बनने के बाद जल्दी ही टूट रही है। नालियां जल निकासी की बजाय, जलभराव का कारण बन रही हैं।

बिना किसी उचित योजना और उचित मानदंडों के नगर में सड़कें बनायी जा रही हैं। ऐसे खेतों और गैर आबाद क्षेत्र से होकर सड़कें गुजारी जा रही हैं जहां यह भी पता नहीं कि आबादी कब होगी या मकान बनेंगे भी या नहीं। ऐसे स्थानों पर जैसी चाहो सामग्री लगाओ, कोई पूछने वाला ही नहीं। इसीलिए आबादी के बजाय गैर आबाद प्लांटों और खेतों के किनारे सड़कें बनाई जा रही है। यहां जल निकासी को नालियां भी नहीं बन रहीं। हो सकता है एस्टीमेट में नालियां दर्ज कर दी गयी हों।

लोग जांच की मांग करते हैं, तो जांचकर्ता भी लीपापोती करके चले जाते हैं। ढेरों शिकायतों पर भारी गड़बड़ी के बावजूद जांच में कुछ भी नहीं होता। अब लोग घेराव करें या सभासद नाराजगी जतायें, चेयरमेन और इ.ओ. पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। लोगों ने मौजूदा बोर्ड को भंग कर पालिका बोर्ड के चुनाव की मांग शुरु कर दी है।

—टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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