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उम्मीदवारों की भीड़ में कामेन्द्र की रफ्तार तेज़

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जिला पंचायत के वार्ड-13 में चुनावी घमासान काफी तेज है। यहां के मतदाताओं का रुख अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन घोषित आधा दर्जन उम्मीदवारों में कामेन्द्र सिंह, इंदिरावती, अबरार सैफी, नफीस सैफी, चन्दन सिंह यादव और गोविन्द सिंह खड़गवंशी पूरे दम-खम के साथ मैदान में हैं।

यहां ब्लॉक प्रमुख मंजू चौधरी के पति कामेन्द्र सिंह सपा उम्मीदवार की हैसीयत से मैदान में हैं। वे क्षेत्र में लंबे समय से सामाजिक समरसता के लिए काम करते रहे हैं। इसी कारण वे सभी वर्गों में निर्विवाद और धार्मिक सद्भाव बनाये रखने वाले नेताओं में अग्रणी माने जाते हैं। उनकी यह छवि उनकी मजबूती का कारण बनती जा रही है। सभी वर्गों के लोग उनका सम्मान कर रहे हैं। दूसरी बड़ी ताकत उन्हें सपा विधायक अशफाक खां का समर्थन देना है। यह वार्ड विधायक का गृह वार्ड है जहां उनका सबसे अधिक प्रभाव है। अपने बेहतर संबंधों के कारण उन्होंने यहां से कामेन्द्र सिंह को हरी झंडी दी है। यदि खां यहां से कामेन्द्र सिंह को विजयी बनाने में सफल रहे तो विधानसभा चुनाव में कामेन्द्र सिंह के कारण उन्हें बहुसंख्यक मत हासिल करने में आसानी रहेगी।

दूसरी ओर अबरार सैफी और चन्दन सिंह यादव भी स्वयं को सपा समर्थित उम्मीदवार कहकर वोट मांग रहे हैं। अबरार तो सपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव उमर फारुख सैफी के छोटे भाई हैं, लेकिन उन्हें दूसरे सपा नेताओं का अभी तक समर्थन नहीं मिला इसलिए कुछ कहना जल्दबाजी होगा। इतना जरुर है कि उमर फारुख सैफी भी यहां प्रभाव रखते हैं और वे प्रचार अभियान तेजी से चला रहे हैं। चन्दन सिंह यादव इस वार्ड में सपा समर्थकों में भी खास पहचान नहीं रखते। वे कुछ नेताओं के फोटो लगाकर जीत चाहते हैं।

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पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष इंदिरावती बिना किसी दल के समर्थन का नाम लिए मैदान में हैं। वैसे वे रालोद नेता बलवीर सिंह की धर्मपत्नि हैं। वे बलवीर सिंह के नेतृत्व में बेटे निरंजन सिंह की युवा टीम के बल पर वार्ड में युद्धस्तर पर प्रचार में संलग्न हैं। उनका दावा है कि वे अपने कार्यकाल में किये विकास कार्यों से लोगों का दिल जीतेंगी।

गोविन्द सिंह खड़गवंशी पिछले चुनाव में विजयी रहे थे। उन्होंने कार्यकाल में लोगों से कोई सरोकार नहीं रखा जिससे लोग उनका विरोध कर रहे हैं। गंगा तटवर्ती निवासी यह युवा नेता इस बार खतरे में है।

नफीस सैफी भी चुनाव प्रचार में जुटे हैं। वे बसपा के उपेक्षित नेता हैं। वे चुनावों में अभी तक दुर्भाग्यशाली रहे हैं। पता नहीं इस बार उनका भाग्य चमकेगा या पिछली हालत दोहरायेगा।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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