हाजी-नफीस-सैफी

नगर निवासी हाजी नफीस सैफी वार्ड-13 से जिला पंचायत सदस्य पद के उम्मीदवार हैं। उनका प्रचार का ढंग दूसरे सभी उम्मीदवारों से अलग है। वे पूरी ईमानदारी के साथ दो दशक लंबे अपने राजनैतिक सफर की उपलब्धियों से अधिक नाकामियों का प्रचार कर वोट मांग रहे हैं।

उन्होंने अपनी नाकामियों को लोगों के सामने रखने के लिए वाकायदा हाल ही में मोटी रकम खर्च दो दैनिकों में बड़े-बड़े विज्ञापन भी छपवाये हैं।

1992 में से बसपा से जुड़े हाजी सैफी ने 2002 में हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के लिए एमएलए का टिकट मांगा, नहीं मिला, 2007 में फिर मांगा, तो उनके बजाय हाजी शब्बन को उम्मीदवार बनाया और नफीस सैफी से शर्त रखी कि हाजी शब्बन को जितवाओगे तो एमएलसी बनवा देंगे। यह वादा वरिष्ठ बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने किया था। शब्बन चौधरी को जितवाने के बाद एमएलसी तो क्या बनाते, पार्टी में उपेक्षा का दौर शुरु हुआ बल्कि 2012 में टिकट मांगा तो पार्टी से ही बाहर कर दिया। उन्होंने मजबूर होकर महानदल से चुनाव लड़ा, तो जमानत को भी तरस गये। वे 2010 में जिला पंचायत का चुनाव भी लड़े थे लेकिन हार गये। कहते हैं उन्हें हराया गया। वे 2009 में एमपी उम्मीदवारी के लिए भी टिकट मांग रहे थे लेकिन उन्हें किसी ने घास नहीं डाली। अपना यह राजनैतिक सफर, जो नाकामियों से भरा है, ईमानदारी के साथ विज्ञापनों के जरिये, नफीस सैफी ने बयां किया है।

वे शुरु में यह शेर में भी लिखते हैं -

'मेरी जिंदगी का मकसद है कि सभी को फैज पहुंचे, 
मैं दीया हूं मंजिलों का मुझे हर कोई जलाये।’

अब यह तो समय ही बतायेगा कि लोग उन्हें इस बार जितायेंगे अथवा उनके शेर के आखिरी शब्द की तरह जलायेंगे। वे स्वयं कह रहे हैं -'मुझे हर कोई जलाये।’

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-टाइम्स न्यूज़ हसनपुर.

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