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वार्ड 10 : अरे भाई ये सन्नाटा क्यों है?

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जिस वार्ड 10 में चुनाव की आहट के साथ ही जीत के दावों के साथ कई उम्मीदवार मैदान में उतर गये थे, वहां अब सन्नाटा है। भाजपा, बसपा और सपा जैसी प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवारों के बारे में भी पता नहीं चल रहा। वैसे सपा की ओर से वेदपाल सिंह को अधिकृत माना जा रहा है, साथ ही वे प्रचार में भी लगे थे, लेकिन फिलहाल वे भी हलके पड़ गये हैं। अब सभी लोग पन्द्रह सितंबर के बाद अपने पत्ते खोलेंगे। चुनाव की नजदीकी के वावजूद जिला पंचायत के इस वार्ड में अब काफी अनिश्चितता का माहौल है।

सपा के वेदपाल सिंह पार्टी के घोषित उम्मीदवार हैं और वे बेदाग छवि के प्रभावशाली व्यक्ति हैं। जाट बाहुल्य इस वार्ड में उनकी स्थिति अच्छी है, लेकिन इस चुनाव में सपा के एक प्रभावशाली नेता द्वारा आरक्षण के बहाने जाटों को मैदान से बाहर करने के प्रयास के कारण जाट समुदाय यहां सपा के खिलाफ है। ऐसे में यह समुदाय सपा को हराने का प्रयास कर रहा है, चाहें इसके लिए वे किसी को भी समर्थन दें। यह चुनावी हालात पर पता चलेगा कि आगे क्या समीकरण बनते हैं।

बसपा और भाजपा अभी अनिर्णय की हालत में हैं, वे अपने उम्मीदवार ही नहीं तय कर पा रहे। उधर शुरु से मैदान में डटी यहां की एकमात्र महिला उम्मीदवार पायल चौधरी भी भाजपा से उम्मीदवारी का प्रयास कर रही है। पायल का मजबूत पक्ष यहां से अकेली महिला होना है। यह समय बतायेगा कि महिलायें इस महिला को कितना चाहती हैं?

धर्मेन्द्र सिंह (लालू सिंह) भी यहां से भाजपा उम्मीदवारी का दावा करके मैदान में हैं।

यदि बसपा भूपेन्द्र सिंह को मैदान में लाती है तो वे भी यहां बहुत दमदार सिद्ध होंगे। बार-बार उलट-पलट से अभी वे भी खामोश हैं। अब 15 के बाद ही दस का सन्नाटा टूटेगा।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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