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जिला पंचायत चुनाव लड़ने में चौथी बार विफ़ल

जाफर-मलिक

जाफर मलिक इस बार भी जिला पंचायत का चुनाव लड़ने की इच्छा पूरी नहीं कर पाये। इस बार वे फर्जी निवास प्रमाण-पत्र बनवा कर चुनाव लड़ना चाहते थे, पकड़ में आने पर उनकी हसरत फिर पूरी नहीं हो सकी। वे दस वर्षों में चार प्रयास जिला पंचायत लड़ने के कर चुके लेकिन हर बार कुछ न कुछ मुसीबत खड़ी हो जाती है कि उन्हें मैदान छोड़ना पड़ता है या उन्हें मैदान से बाहर कर दिया जाता है।

इस बार जाफर मलिक वार्ड 11 से चुनाव मैदान में उतरे थे। प्रचार शुरु ही किया था कि वार्ड आरक्षित होने से उन्हें पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा। उन्होंने 13 से तैयारी शुरु की तो एसडीएम की जांच में उनका निवास प्रमाण-पत्र फर्जी निकला। रहते गजरौला में हैं और प्रमाण-पत्र वारसाबाद का बनवा लिया। अब यह प्रमाण पत्र बनाने वाले कर्मचारी भी फंस गये हैं।

उन्होंने 2010 में भी वार्ड 9 से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी लेकिन तब वह वार्ड एससी आरक्षित हो गया। उन्हें इरादा त्यागना पड़ा। 2005 में पहली बार चुनाव की तैयारी की थी तब उन्हें बसपा से टिकट न मिलने के कारण इरादा बदलना पड़ा था।

जाफर पर यह चौथी बार गाज गिरी है। इस बार फर्जीवाड़े में वे पकड़ में आ गये। आगे को वे पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ने की तैयारी करने का विचार कर रहे हैं।

लेखपाल और राजस्व विभाग की लेखाकार का जबाव-तलब
कई ऐसे लोग हैं जो इस प्रकार के फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाकर चुनाव लड़ते हैं। उनमें से कई सफल भी हो जाते हैं। जाफर मलिक भी पकड़ में नहीं आ सकते थे। यह तो राजवीर सिंह पुत्र शीशराम सिंह की सक्रियता से पता चल गया।

प्रमाण-पत्र बनाने वाले विभागीय कर्मचारी इसमें सीधे दोषी हैं। एसडीएम ने गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। फर्जी कागज बनवाने और बनाने वालों को एक ही पैमाने पर तोला जाना चाहिए।

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-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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