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कानून नहीं रोक पा रहा अवैध खनन

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उत्तर प्रदेश में अवैध खनन एक बड़ा कारोबार बन गया है। राजनीति पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता, बालू माफिया, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले तत्व, पुलिस प्रशासन और राजस्व विभाग के कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक एक मजबूत गठबंधन के सहारे इस अवैध कारोबार को चला रहे हैं। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालयों के आदेश के वावजूद यह कारोबार नहीं रुक रहा। अदालतों के आदेशों की आड़ में पुलिस, राजस्व और खनन विभाग वाले कई गरीब किसानों या जरुरतमंदों को अवैध रुप से प्रताड़ित जरुर करते रहते हैं। सख्त कानून उपरोक्त संगठित खनन माफियाओं और पुलिस को अवैध कमाई का द्वार ही खोलने का काम कर रहे हालांकि अवैध खनन रोकने में ऐसे कानून बिल्कुल विफल रहे हैं।

ब्रजघाट में गंगा के दोनों ओर बालू और रेत का खनन निषिद्ध है लेकिन बालू खनन माफिया प्रतिदिन लाखों रुपयों का रेत खुलेआम गंगा से निकालकर बेच रहे हैं। एक ट्राली दस हजार तक की है। प्रतिबंध से पहले यह तीन हजार की थी। प्रतिबंध के बाद खनन, राजस्व, वन विभाग, पुलिस और बड़े नेताओं का कमीशन भी लग जाता है। कड़ा कानून तीन हजार की ट्राली को दस हजार में कर देता है, लेकिन अवैध खनन नहीं रोक पाता। उपरोक्त तत्वों की ताकत कानून की ताकत खत्म कर देती है।

दूसरी ओर यदि कोई किसान, मजदूर या जरुरतमंद अपने घर के लिए अपने या किसी अपने करीबी व्यक्ति के खेत से एक ट्राली मिट्टी भी लाने का प्रयास करता पाया जाता है तो खाकी को कानून याद आता है। ट्रैक्टर-ट्राली और मिट्टी थाने में बंद कर अवैध खनन का मामला बना दिया जाता है। इसमें खनन, राजस्व तथा एसडीएम तक सक्रिय होते हैं। खनन प्रकरण में जुर्माना वसूला जाता है। कानून कमजोर पर इस तरह बहुत तेज काम करता है। सबूत के लिए गढ़ तथा गजरौला के थानों में बहुत से किसानों पर इस तरह के मामले दर्ज होते रहते हैं। खनन माफियाओं के द्वारा आप आसानी से जितनी चाहे रेत या मिट्टी मंगवा लें। कोई नहीं रोकने वाला। यह अलग बात है कि आपको उसकी कीमत बहुत अधिक देनी पड़ती है। खनकते चांदी के सिक्कों की खनक कानून को ही बेमतलब कर देती है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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