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विद्युत विभाग द्वारा ईमानदार उपभोक्ताओं का चौतरफा शोषण

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बिजली विभाग के अधिकारी और बाबू मिलकर उन्हीं उपभोक्ताओं के शोषण पर उतारु हैं, जो बिजली का समय से भुगतान करते आ रहे हैं। इसमें मीटर रीडिंग का ठेका लेने वाली कम्पनी के कर्मचारी तथा बिजली विभाग के बाबू बहुत ही मजबूत तालमेल कर भले और ईमानदारों की जमकर जेब काट रहे हैं। इसपर भी एसडीओ एसपी सिंह स्वयं को बेदाग होने का दावा कर लुटेरे बाबुओं का मनोबल बढ़ा रहे हैं। विधायक एम चन्द्रा और उनके दो-चार समर्थक विभाग के अधिकारियों की पीठ थप-थपाकर व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए रास्ता और भी आसान कर गये। इसके बाद उपभोक्ताओं की सुनवाई बिल्कुल ही बन्द हो गयी। एसडीओ कार्यालय के दो बाबू तो बिल्कुल बेलगाम हैं।

कार्यालय खुलते ही इन दोनों बाबुओं के आगे अनाप-शनाप भेजे बिलों को ठीक कराने वालों की भीड़ लग जाती है। बिना रीडिंग किये ही बिल भेजने की यहां आम शिकायते हैं। भूल-चूक का मामला हो तो कभी-कभार एक-दो बिलों में चूक हो सकती है। यहां तो अधिकांश बिलों में ही गड़बड़ी है, जिसके लिए यहां ठेकेदारों और विभागीय बाबुओं में मजबूत गठबंधन काम कर रहा है।

पहले बढ़ाचढ़ाकर बिल भेजा जाता है। उसे ठीक कराने जाते हैं तो बड़ा बाबू और एक दूसरा बाबू ग्राहक से आसानी से बात ही नहीं करते। अधिकांश लोगों के बिलों में गड़बड़ी के कारण दफ्तर में भीड़ स्वाभाविक है। इसलिए लोगों को खड़े-खड़े समय हो जाता है। सभी लोग अपना-अपना रोजगार छोड़कर आते हैं। कई-कई चक्कर काटने पर भी काम नहीं बनता कभी छुट्टी, कभी कम्प्यूटर के काम न करने का बहाना, कभी बाबू का न बैठना, कभी एसडीओ का न मिलना, इसी तरह अगला बिल पेनल्टी के साथ आ जाता है।

परेशान उपभोक्ताओं में से बहुत से उसी बिल को जमा करने को मजबूर होते हैं। कुछ सौदेबाजी कर कम करवाने में सफल हो जाते हैं। कई के बिलों में लेट फीस जमा होने के बावजूद, उनकी अतिरिक्त वसूली की रसीदें भी काटी जाती हैं। यहां दंड शुल्क पर भी दंड शुल्क लगता है। इस प्रणाली से यहां के अधिकारियों को विभाग को यहां से अधिक धन जुटाने पर वाहवाही मिली है। अधिशासी अभियंता ए.के. अत्री का तो इसीलिए प्रमोशन हाल ही में हुआ है।

दूसरी ओर उपभोक्ताओं पर बहुआयामी मार पड़ रही है। बिल कम करने के नाम पर लूट, बाबुओं की लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण विलम्ब कर, कीमती समय की बरबादी और मानसिक यंत्रणा का उन्हें शिकार होना पड़ रहा है। बिजली मानव जीवन की बेहद अनिवार्य आवश्यकता हो चुकी, ऐसे में उससे अलग नहीं हुआ जा सकता है। कई परेशान लोग अब मजबूरी में उपभोक्ता फोरम की शरण में जाने का मन बना रहे हैं। जबकि कई लोग विभागीय कारिन्दों का घेराव कर उन्हें कठोर सन्देश देने के पक्ष में हैं। कुछ भी हो लोग इतने परेशान हो चुके हैं कि उन्हें कुछ न कुछ करना ही होगा।

-टाइम्स न्यूज़.

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