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सीएमओ और नोडल अधिकारी के साये में सेहत से खिलवाड़

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अमरोहा में पांच हजार झोलाछाप चिकित्सक धड़ल्ले से लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। जबकि मुख्य चिकित्साधिकारी और एक नोडल अधिकारी को ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्यवाही का कानूनी अधिकार है। इन अधकचरे डाक्टरों से इन दोनों अधिकारियों को प्रतिवर्ष करोड़ों की अवैध कमाई होती है जिसके कारण एक दो बार वर्ष में औपचारिक छापामरी करके इनके खिलाफ कोई कार्यवाही न करके सम्बंधित अधिकारी एक निश्चित सुविधा शुल्क तय करके उन्हें लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का मौखिक लाइसेंस प्रदान कर देते हैं।

अकेले गजरौला नगर क्षेत्र में ही दर्जन भर ऐसे चिकित्सक है जिन्हें चिकित्सक लाईसेंस या डिग्री प्राप्त नहीं और वे धड़ल्ले से लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। एक चिकित्सक झोलाछाप है और वह धड़ल्ले से बाल रोग विशेषज्ञ बनकर अंग्रेजी दवाओं का इस्तेमाल कर बच्चों के जीवन से खेल रहा है। लोग भेड़ा चाल के चलते यह भी नहीं सोचते कि जिससे वे दवाई ले रहे है वह डॉक्टर हैं भी या नहीं।

कई बंगाली डाक्टर के नाम पर बैठकर तिलस्मी और एलोपैथिक इलाज कर रहे है। इनके पास तो आयुर्वेद अथवा अन्य कोई भी प्रमाण-पत्र नहीं जबकि ये कैंसर, भगंदर और बावासीर का ऑपरेशन कर रहे है।

अमरोहा नगर में ऐसे चिकित्सकों की सबसे ज्यादा संख्या है जो पौरूष शक्ति और निसंतान लोगों को निजात दिलाने के नाम पर लम्बी ठगी कर रहे है। इस तरह के नीम हकीम घास फूंस  और कई कैमिकल्स के प्रयोग से स्वनिर्मित दवाओं का कारोबार कर रहे है। इनके कारोबार विदेशों तक में फैले है। जिससे वर्षों पूर्व साईकिलों पर घूमने वाले इन हकीमों के पास आज शाही महलों जैसे आवास, अथाह सम्पत्ति और आय के कई अन्य स्त्रोत उपलब्ध है। इन लोगोें ने राज्य के कई शहरों में कार्यालय भी खोल रखे है। जहां बैठने का दिन तय है। दिल्ली में भी इनके सफाखाने है जहां सेहत के बहाने मरीजों की जेबें सफा करने के साथ साथ कुछ और भी सफा कर दिया जाता है।

ग्रामांचलों में बैठे झोलाछाप चिकित्सक यदि छुटपुट चिकित्सा जैसे चोट-मौच, अचानक दर्द अथवा आपातकालीन राहत जैसी सुविधाओं में  योगदान कर मरीज को योग्य चिकित्सक तक पहुंचाने का साधन बने रहे तो बेहतर होगा क्योंकि शहरों से दूर बसे गांवों में चिकित्सा उपलब्ध न होने पर ये समय का तीर सिद्ध होते है लेकिन उससे आगे बढ़ने पर इन लोगों से खतरा हो सकता है।

कानूनी कार्यवाही का भय दिखाकर सम्बंधित अधिकारी इनसे अवैध वसूली करते हैं। यही कारण है कि वे यह जानते हुए भी ये गैर कानूनी काम कर रहे है। उनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं करते। जिले के लगभग पांच हजार से अधिक इन झोलाछापों की बातें माने तो उनसे जिले के स्वास्थ्य अधिकारी दस हजार प्रति चिकित्सक से लेते है। ऐसे में पांच करोड़ की अवैध कमाई एक बड़ा घोटाला है। इसमें जांच करके हकीकत सामने आनी जरूरी है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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