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केजरीवाल को याद कर रहे हैं यूपी वाले

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छठ पूजा पर श्रद्धालुओं के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में यमुना नदी के किनारे एक सौ चालीस पक्के घाट बनवाकर उनपर शेड बनवाये। जिससे श्रद्धालु सुविधाजनक ढंग से अपनी धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कर सकें। घाटों पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह चाकचौबंद रखी गयी। यह एक ऐसी सरकार का काम है जिसके हाथ कई जगह कानूनी रुप से दूसरे राज्यों की सरकारों से बहुत कमजोर हैं। उसके अधिकार भी बेहद सीमित हैं। उसे सत्ता में आये हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ तथा देश की सबसे ताकतवर केन्द्र सरकार और सबसे अधिक समय तक देश पर शासन करने वाली पार्टी, दोनों ही इस अल्प अधिकार प्राप्त सरकार के कामों में व्यवधान के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ते। मीडिया का भी एक वर्ग इसे बदनाम करने की पूरी कोशिश करता है।

दूसरी ओर देश के सबसे बड़ी आबादी के राज्य उत्तर प्रदेश में आजकल कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर गढ़ तथा तिगरी में उत्तरी भारत का वार्षिक गंगा स्नान मेला शुरु हो गया है। यहां गंगा के दोनों ओर लगभग पचास लाख श्रद्धालु गंगा स्नान और अनेकानेक धार्मिक पूजा विधान सम्पन्न कराने को एकत्र होते हैं। प्राचीनकाल से जारी इस त्योहार पर स्नानार्थियों के लिए प्रदत्त सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं आया है। जबकि गंगा तट पर पक्के घाट सबसे बड़ी जरुरत है। इससे लोग रेत में अपने गीले और सूखे वस्त्रों को रखने के बजाय पक्के घाटों पर बनी बेंच आदि पर रख सकते हैं। साथ ही शेड के नीचे बैठ या खड़े होकर गंगा के मनोहारी दृश्यों का अवलोकन भी कर सकते हैं। धार्मिक कर्मकांडों को सम्पन्न कराने में भी आसानी रहेगी।

प्रतिवर्ष मेले के उद्घाटन और समापन पर डीएम की अध्यक्षता में क्षेत्र के गणमान्यों तथा पत्रकारों की बैठकें होती हैं। जिनमें हर बार पक्के घाटों की मांग उठायी जाती है। आश्वासन भी मिलता है। राज्य सरकार से भी मांग करने वालों की कमी नहीं लेकिन शासन और प्रशासन इतने से बिल्कुल भी आगे नहीं बढ़ते।

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इस मेला क्षेत्र से मात्र सौ किलोमीटर दूर दिल्ली में छठ पर मिली राज्य सरकार से सुविधाओं के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश की सरकार को नसीहत लेते हुए ही सही, गढ़ व ब्रजघाट में पक्के घाट बनवाने चाहिए। यदि वह अब भी आंखें नहीं खोलती तो यहां के लोग सपा सरकार की सफाई का रास्ता तैयार करने में जुट जायेंगे। लोग तो अभी से अरविन्द केजरीवाल को याद करने लगे हैं।

-जी.एस. चाहल.

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