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नेपाल से भारत के बिगड़ते रिश्तों के मायने


भारत से नेपाल के संबंध बिगड़ चुके हैं। दोनों देशों में कड़वाहट बनी हुई है। मौजूदा हालात को देखकर लगता है कि स्थिति सामान्य होने में लंबा समय लगेगा। यदि ऐसे ही चलता रहा तो हालात खराब होते रहेंगे।

नेपाल में नये संविधान बनने के बाद से ही रिश्तों में खटास आनी शुरु हो गयी थी। मधेसियों का कहना था कि संविधान में उनके हकों को खत्म किया गया है। उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

जबकि नेपाल की सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि ऐसा कुछ नहीं है। वहां के उप-राष्ट्रपति ने स्वयं एक चैनल से कहा कि मधेसी नेपाल के हैं। नेपाल भारत से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। भारत को अपने रुख में नरमी दिखानी होगी तभी समस्या सुलझ सकती है।

हाल के दिनों में बोर्डर पर भारी तनाव देखने को मिला है। अबतक 50 से अधिक लोगों की संघर्ष में मौत हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में लोग घायल हुए हैं। कई पुलिसवालों को भी मार दिया गया है। स्कूल-कालेज बीच-बीच में बंद हुए जिससे पढ़ाई प्रभावित हुई।

नेपाल ने भारत के चैनलों पर प्रतिबंध लगाया। साथ ही भारत पर मधेसियों को उकसाने के आरोप भी लगाये गए।

चीन ने नेपाल और भारत की दूरी का फायदा उठाया। एक तरह से नेपाल के सामने मजबूरी भी है कि वह तेल, दवाईयां आदि जरुरत के सामान के लिए किसके पास जाये।

भारत के लिए यह खतरे की बात है कि नेपाल चीन के करीब जा रहा है। यदि गतिरोध समाप्त नहीं हुआ तो नुकसान हमारा होगा।

राजनैतिक रुप से माहौल तनावपूर्ण हुआ है। दोनों देशों के राजनेताओं ने इसे लेकर हल निकालने की उतनी कोशिश नहीं की है। बल्कि मौके-मौके पर नेपाल में मामले को तूल अधिक दिया गया है।

समय से यदि इस मसले का हल हीं निकला तो भारत के लिए यह फायदे का सौदा नहीं होगा।

-टाइम्स न्यूज़.

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