छोटी पंचायत के चुनाव पर सुरा का सरुर भारी

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जिस प्रकार शराब और दावतों के दौर को आदर्श चुनाव आचार संहिता जिला पंचायत चुनाव में नहीं रोक पायी, उसी तरह ग्राम पंचायत चुनावों में भी उसपर निर्वाचन आयोग का कोई नियंत्रण नहीं। बहुत से लोगों में तो उम्मीदवार अपनी भट्टियों में कच्ची शराब तैयार कर लोगों में बांट रहे हैं तथा इसी के बल पर अपने वोट पक्के कर रहे हैं। आबकारी विभाग के कारिंदे अपनी सक्रियता दिखाने को दो चार जगह थोड़ी बहुत शराब पकड़ कर अपना दायित्व पूरा करना सिद्ध कर देते हैं।

कच्ची शराब के अवैध लघु उद्योग गंगा के खादर में बारहों महीने निर्बाध चलते हैं। इन्हें शीरा जैसा कच्चा माल एक ताकतवर सत्ताधारी नेता का रिश्तेदार टैंकरों के जरिये सप्लाई करता है। पुलिस तथा आबकारी विभाग के कारिन्दे यह सब, सबसे अधिक जानते हैं। वे जानबूझकर ऐसे तत्वों से या तो बचकर खेलते हैं या समझौता कर लेते हैं। चुनाव के दौरान खादर में यह तत्व अधिक सक्रिय हो जाते हैं। लगभग सभी गांवों में इस समय सुरा बांटी जा रही है। मतदाता जमकर शराब का लुत्फ उठा रहे हैं। कई नयी उम्र के किशोरों को भी नशे की लत लगाने का काम चल रहा है।

ग्राम-प्रधान-चुनाव-२०१५

गैर खादर क्षेत्र में अंग्रेजी शराब की भी अच्छी खपत है। लोग खुलेआम कह रहे हैं कि कच्ची में कच्चे वोट, पक्की में पक्के वोट।

चुनाव में सारे खर्च एक तरफ और शराब का खर्च एक तरफ है। आदर्श आचार संहिता पर चौदहवां रत्न भारी पड़ रहा है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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