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बढ़ती आबादी पर ब्रेक जरूरी

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आबादी के लिहाज से दुनिया का दूसरा बड़ा देश भारत लगता है निकट भविष्य में पहले स्थान पर पहुंचने वाला है। हम दूसरी सभी उपलब्धियों में भले ही दुनिया में बहुत निचले पायदान पर हो लेकिन आबादी बढ़ाने में हमने आजादी के बाद बहुत तरक्की की है लगता है मानो हमें देश की आबादी बढ़ाने की ही आजादी मिली है। तेजी से बढ़ रही आबादी देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है जिसकी ओर किसी का भी धयान नहीं जा रहा है। उल्टे आबादी बढ़ाने में अधिक योगदान देने वालों को चौतरफा प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यही कारण है कि संसाधन बढ़ाने के बावजूद आम आदमी की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही तथा खाद्य संकट का भी खतरा शुरू हो गया है।

जो लोग खाद्य पदार्थों की महंगायी और मिलावटखोरी का शोर मचा रहे हैं उन्हें मालूम होना चाहिए कि आबादी के अनुपात में इसका उत्पादन न बढ़ने से इस समस्या को बढ़ावा मिल रहा है। प्याज और आलू जैसी मुख्य सब्जियों में आयी तेजी का कारण भी यही है। दवाईयां, सीमेंट, घी, दूध और दालें आदि लगातार तेजी पर है। जब खपत बढ़ रही है तो महंगायी होना स्वाभाविक है।

दलित और मुस्लिम आबादी के सर्वांगीण विकास के नाम पर सैकड़ों योजनायें केन्द्र और राज्य सरकारें चला रही हैं। व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण इन दोनों वर्गाें में भी इन योजनाओं का लाभ सक्षम लोग ही उठा रहे है। यही कारण है कि इन दोनों वर्गाें मेंं आर्थिक विषमता सबसे अधिक है। सरकारों ने देश की आमदनी का एक बड़ा भाग इन दोनों वर्गाें के उत्थान पर झोंक रखा है।

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चुनाव के दौरान सभी दलों में इस और कुछ ज्यादा ही होड़ लग जाती है। कहा कुछ भी जाये इन दोनों वर्गाें के आर्थिक रूप में पिछड़ने का प्रमुख कारण अधिक बच्चे पैदा करना है। इनके अलावा दूसरे सभी वर्गों ने आबादी को नियंत्रित करने में पूरा सहयोग दे रखा है। देश की आबादी को शिखर पर पहुंचाने में दोनों वर्ग एक दूसरे से होड़ कर रहे है मानों उनका यही एकमात्र ध्येय रह गया है।

इन वर्गों के उत्थान पर भाषण देने वाले नेता अथवा समाज सेवी आज तक यह कहते नहीं सुने गये कि वे इस समस्या पर लगाम लगायें। नेता और समाज सेवी इन वर्गों की बढ़ती आबादी का लाभ उठाते आ रहे है। वोट की राजनीति के भूखे नेताओं को भला इनकी आबादी नियंत्रित होने से क्या लाभ मिलेगा। दोनों वर्गों के धार्मिक नेता तो उल्टे उन्हें आबादी बढ़ाने को कहते है। उनका तर्क होता है कि वोट से सत्ता मिलती है अतः संख्या के बल पर ही भारत मे सत्ता पर कब्जा किया जा सकता है। नेता और धर्माधिकारी देश और जनता की लगातार बढ़ रही दिक्कतों को दरकिनार कर अपनी-अपनी कुर्सियां मजबूत करने को हमें बरगलाते आ रहे है और हम लोग बिना सोचे समझे आंख मूंद कर उन्हें स्वीकार करते आ रहे हैं।

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यदि समय रहते हमने अविलम्ब बढ़ती आबादी पर काबू नहीं पाया तो देश गंभीर समस्याओं को और भी जटिल बना लेगा। ऐसे मेंं आगामी समय में लोगों को पीने का पानी, दूध, अनाज और सब्जियां जैसे अति जरूरी पदार्थ भी उपलब्ध होने दुश्वार हो जायेंगे। सड़कों पर चलने को जगह नहीं। रेलगाड़ियों में सीटें नहीं मिलती । त्योहारों पर आने जाने वाले असुरक्षित है। लेकिन नेताओं की रैलियों में भीड़ जुटाने को यहां लोगों की खूब भीड़ है। यदि देश की आबादी नियंत्रित हो गयी तो आये दिन होने वाली रैलियोें में भीड़ कहां से जुटेगी? यह समस्या राजनेताओं और धार्मिक नेताओं सभी के सामने होगी? आबादी नियंत्रित कराकर वे अपना काम क्यों बिगाड़े?

-टाइम्स न्यूज़.

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