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कौशिक के आदर्शों और विचारों के अनुसरण का आहवान

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वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता स्व. रमाशंकर कौशिक को उनकी सातवीं पुण्यतिथि पर स्मरण करते हुए सपा नेताओं ने उन्हें समाजवादी पार्टी की रीढ़ बताते हुए उनके दिखाये रास्ते पर चलने का आहवान किया। रविवार को स्व. कौशिक के बेटे तथा सपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राहुल कौशिक ने अपने पैतृक आवास अवंतिका पर अपने पिता का स्मृति दिवस मनाने को एक कार्यक्रम का आयोजन किया था।

इस मौके पर सपा राज्यसभा सदस्य जावेद खां ने कहा कि वे स्व. कौशिक की पाठशाला से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि एमएलए या एमपी बनने से आदमी बड़ा नहीं हो जाता। उसका कद जनसेवाओं से नापा जाना चाहिए।

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स्व. रमाशंकर कौशिक के बारे में नेताओं ने गजरौला के अवंतिका में अपने विचार रखे और उनके आदर्शों इज चलने को कहा.

उन्होंने स्व. कौशिक का स्मरण करते हुए उन्हें सच्चे समाजवादी और सपा की रीढ़ की संज्ञा दी और कहा कि उन्होंने 1950 से राजनीति शुरु की तथा 1977 में पहली बार विधायक बने। जबकि आजकल लोग राजनीति में कदम रखते ही पद मांगने लगते हैं।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज तो गुंडे और बदमाश भी विधायक और एमपी बन जाते हैं। जो लम्बी-लंबी गाड़ियां तथा दस-पांच मुसटंडे भी साथ रख लेते हैं। यदि दो-चार पुलिस वाले भी साथ ले लिए तो फिर कहना ही क्या?

जावेद खां ने स्व. कौशिक को सच्चा समाजवादी करार देते हुए कहा कि लंबा राजनैतिक सफर तय करने के बाद भी उन्होंने किसी पद या पुरस्कार की इच्छा नहीं रखी। बल्कि वे संघर्ष के समय भी पार्टी को मजबूती प्रदान करने में लगे रहे। हम सभी कार्यकर्ताओं को उनसे शिक्षा लेते हुए उनके आदर्शों और शिक्षाओं का पालन करना चाहिए।

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विधायक अशफाक खां ने भी स्वर्गीय सपा नेता का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि वे एक मुसलमान हैं लेकिन उनके राजनैतिक गुरु रमाशंकर कौशिक जैसे ब्राह्मण थे। जो सामाजिक समरसता, भाईचारे और समाजवाद के प्रबल पक्षधर थे।

मंडी धनौरा के पूर्व चेयरमेन कमल अग्रवाल ने कहा कि वे रमाशंकर कौशिक ही थे जिन्होंने क्षेत्र के तीन हजार नौजवानों को नौकरियां दिलवायीं। उनके जैसे नेता की बराबरी भला कौन कर सकता है?

अग्रवाल ने उनके बेटे राहुल कौशिक की भी प्रशंसा की कि वे अपने पिता के बताये मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।

सपा विधायक एम. चन्द्रा ने स्व. कौशिक का स्मरण करते हुए गजरौला का नाम बदलकर कौशिक नगर रखने का सुझाव रखा। तभी हाजी अब्दुल सलाम ने तिगरीधाम को कौशिकधाम नाम देने का सुझाव पेश किया जिसपर मौजूद जनसमूह ने तालियां बजायीं।

बाद में खाद्य एवं रसद मंत्री कमाल अख्तर ने भी स्व. कौशिक को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनकी सेवाओं की जमकर तारीफ की।

राहुल कौशिक ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया और भरोसा दिलाया कि बाबू जी भले ही हमारे बीच अब नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा स्थापित उच्च समाजवादी मानदंड और दिशा-निर्देश हमेशा हमारा पथ-प्रदर्शन करते रहेंगे जिनके बल पर हम आगे बढ़ेंगे।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद आलोक तिवारी, बाबू कुरैशी, समसुल हसन उर्फ इतवारी खां, बुद्ध सिंह, विपिन कौशिक, नंगेशाह, तथा रविशंकर शर्मा ने भी विचार रखे। अवंतिका में आयोजित कौशिक स्मृति दिवस में भारी संख्या में सपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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