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रेनू और सकीना में से जिला पंचायत अध्यक्ष का ताज किसके सिर?

रेनू-सकीना-अमरोहा

जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव के बाद अब पूरे जिले की जनता की जिज्ञासा जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर है। लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि जिला पंचायत का नया अध्यक्ष कौन होगा?

यह तो आम राय है कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी सपा ही अपना अध्यक्ष बनाने में सफल होगी। सपा ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं। बसपा और भाजपा उसके बाद हैं जबकि रालोद, कांग्रेस तथा दूसरे सभी दलों का सफाया हो चुका है।

सपा में रेनू चौधरी और सकीना बेगम दोनों ही अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार हैं। जिन्हें लेकर जिले के कद्दावर सपा नेता दो गुटों में बंटे हैं। इस गुटबंदी के कारण ही यहां सपा कुल सीटों की आधा यानि 13 सीटें ही जीत पायी। सपा गुटबंदी की शिकार न होती तो वह 18 सीटों तक जीत सकती थी। तब वह भी पिछली बार बसपा ही तरह अपना अध्यक्ष निर्विरोध बना सकती थी। 

रेनू चौधरी और सकीना के अध्यक्ष बनने का आकलन जनपद में सपा की स्थिति के साथ सपा के शीर्ष नेतृत्व की आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बनायी जा रही रणनीति पर मंथन पर निर्भर करेगा।

सबसे पहले हम अध्यक्ष बनने में रेनू चौधरी के पक्ष में मौजूद तथ्यों पर नजर डालते हैं। रेनू के ससुर चौधरी चन्द्रपाल सिंह सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के पुराने राजनैतिक हमदम हैं। उनका राजनैतिक जीवन यादव से लंबा है। दोनों ही चौधरी चरण सिंह के शिष्य हैं। चौधरी के निधन के बाद से चन्द्रपाल सिंह जय—पराजय में मुलायम सिंह यादव के साथ रहे हैं। सकीना बेगम के पति महबूब अली बसपा सुप्रीमो मायावती के मंत्री मंडल में भी रहे हैं तथा दो बार पाला बदल चुके। फिर भी सपा ने उन्हें मंत्री पद से नवाजा है। जबकि चन्द्रपाल सिंह को कोई बड़ा पद नहीं मिला है। ऐसे में ईमानदारी से जिलाध्यक्ष का पद उनके खाते में जाना चाहिए। रेनू वैसे भी जिले में सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाली उम्मीदवार है। जिले से दूसरे कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर तथा पूर्व सांसद देवेन्द्र नागपाल, सपा विधायक अशफाक भी रेनू चौधरी के पक्ष में खुलकर है। इनका तर्क है कि दो केबिनेट तथा एक दर्जा प्राप्त मंत्री और एक अन्य विधायक मुस्लिम समाज से ही हैं। जिसका बहुसंख्यक समाज में गलत संदेश जा रहा है।

धर्मनिरपेक्ष छवि और हिन्दू मतों को साथ लाने के लिए यह पद रेनू चौधरी को दिया जाना जरुरी है। विधानसभा चुनाव में इससे मजबूती मिलेगी। यदि ऐसा नहीं किया जाता और यह महत्वपूर्ण पद भी एक मुस्लिम (सकीना बेगम) को दे दिया गया। तो विपक्षी भाजपा बहुसंख्यक मतों को अपने पक्ष में एकजुट कर लोकसभा चुनाव जैसी स्थिति कामय करने में सफल हो सकती है।

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सपा का शीर्ष नेतृत्व भी विधानसभा चुनावों को गंभीरता से लेते हुए चन्द्रपाल सिंह तथा देवेन्द्र नागपाल के सहारे हिन्दू मतों की अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है। जैसे ही सकीना बेगम और रेनू चौधरी के नाम की चर्चा हुई है। वैसे ही चन्द्रपाल सिंह के विरोधी हिन्दू भी इस पक्ष में हैं कि रेनू चौधरी को ही अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। विधानसभा की जिले में जिन सभी चारों सीटों पर सपा का कब्जा है, उनमें से अधिकांश तभी बच पायेंगी जब हिन्दू मतों का भी कुछ न कुछ समर्थन मिले। यह तभी संभव है जब नये हालात में जिला पंचायत अध्यक्ष बहुसंख्यक समाज से हो और वह रेनू चौधरी ही हैं।

दूसरी ओर महबूब अली सकीना बेगम को अध्यक्ष पद पर देखने के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। यदि वे सपा हाइकमान से थोड़ी भी ढील लेने में सफल हए तो जैसाकि यहां होता आया है तो तिकड़म और धन बल के सहारे वे यह पद छीन सकते हैं। यह भी सभी जानते हैं कि महबूब अली और कमाल अख्तर में जबर्दस्त सत्ता प्रतिस्पर्धा है। हाल ही में कमाल अख्तर को उनकी तरह कैबिनेट मंत्री बनाया गया। ऐसे में महबूब जिला पंचायत पर कब्जा करने को सभी हथकंडे अपनायेंगे। यह भी हो सकता है कि वे विफल रहने पर गोपनीय ढंग से बसपा का सहयोग कर दें जिससे रेनू चौधरी के बजाय बसपा को सफलता मिल जाये। इसपर लोग एकदम भरोसा भलें न करें लेकिन सभी जानते हैं कि राजनीति में सबकुछ संभव है। सूत्रों से पता चला है कि महबूब अली ने गोपनीय ढंग से सकीना को अध्यक्ष बनाने के लिए सदस्यों का कोरम पूरा करा लिया है।

यह स्पष्ट है कि राजनीति के दंगल में सभी नेता कुर्सी के लिए हर संभव दांव लगाने से नहीं चूकते तो फिर महबूब अली कैसे पीछे रह जायेंगे।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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