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तिगरी का गंगा मेला और सुविधायें

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गंगा तट पर दोनों ओर तिगरी और गढ़मुक्तेश्वर में गंगा मेले का शुभारंभ होने जा रहा है। अभी मेले की तैयारियां चल रही हैं। मुख्य स्नान 25 नवंबर को है।

मेला अब एक सप्ताह से अधिक नहीं ठहर पाता जबकि पहले लोग यहां पन्द्रह दिन तक स्नान और मनोरंजन का आनंद लेते थे। भागमभाग की दिनचर्या में ऐसे काम के लिए लोगों के पास वक्त ही नहीं है। फिर भी कई लाख लोग यहां अस्थाई नगर बनाकर सप्ताह भर रहने का समय निकाल ही लेते हैं। जिसमें किसान और मजदूर अधिक होते हैं।

प्रति वर्ष आयोजक जिला पंचायत की ओर से मेले के दौरान स्नानार्थियों को अधिक से अधिक सुविधायें उपलब्ध कराने के दावे किये जाते हैं। चोरों, जेब कतरों, उठाईगीरों और गुंडागर्दी करने वालों को नियंत्रित करने के लिए भारी फोर्स लगायी जाती है। फिर भी स्नानार्थियों की शिकायतें कम नहीं होतीं। मेले में शौच करने की कभी भी उचित व्यवस्था नहीं की जाती। शौचालय बहुत ही अव्यवस्थित और निम्न स्तरीय होते हैं। जिसके कारण लोग जिनमें महिलायें भी शामिल होती हैं खुले में शौच करने को बाध्य होते हैं। शौचालयों की प्रणाली बदली जानी चाहिए।

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पीने के पानी का भी उचित प्रबंध नहीं होता। हैंड पंप आबादी के अनुपात में बहुत ही कम लगाये जाते हैं। जिनपर पानी के लिए मारामारी होती है। मेला भरने के बाद हैंड पंप लगते हैं जबकि उन्हें पूर्णिमा से सप्ताह पूर्व लगा दिया जाना चाहिए। जहां लोग स्नान करने के लिए जाते हों वहां पीने के पानी की उचित व्यवस्था न होना बहुत ही सोचनीय बात है।

जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश आर्या ने उम्मीद जाहिर की है कि पिछले वर्षों से इस बार बेहतर व्यवस्था रहेगी।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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