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तिगरी मेला छोड़ गया गंदगी के गहरे निशान

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गंगा मेला बीत जाने के बाद गंगा के तट पर गंदगी के ढेर लग गये थे। यह कोई पहली बार ऐसा नहीं हुआ है। सरकार के स्वच्छता अभियान को इससे धक्का लगा है। यहां यह स्पष्ट हो जाता है कि लोगों को हम आसानी से स्वच्छता के बारे में नहीं समझा सकते।

एक बात यह भी है कि क्या लोग जानबूझकर ऐसा करते हैं। जबकि गंगा स्नान एक पवित्र कार्य के रुप में देखा जाता है, लेकिन बहुत से लोगों ने केवल स्नान किया, खुद को साफ किया और चलते बने, लेकिन गंदगी यह कहकर छोड़ दी कि गंगा खुद साफ कर देगी।
 
पॉलीथिन के कारण सबसे अधिक कचरा हो जाता है। इस बार प्रशासन की ओर से उसपर पूरी तरह बैन लगा था। लोग कहां मानने वाले थे। बैन की किसी को परवाह नहीं थी। पॉलीथिन की थैलियों में खाद्य तथा अन्य सामग्री लायी ले जायी गयी। किसी ने किसी को रोका नहीं। रोकने की बात तो दूर किसी को सोचने की जरुरत महसूस नहीं हुई।

समग्र गंगा नाम की संस्थाओं ने मेले बीत जाने के बाद घाटों की सफाई करने की कोशिश की। कुछ संगठन ऐसे भी रहे जो नाम के संगठन हैं। मेला समाप्त होते ही वे अपना बोरिया बिस्तर बांधकर चुपचाप फोटो खिंचवाकर चले गये।

पीएम नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अभियान के लिए अनगिनत भाषण दिये हैं। वे भारत में हों या विदेश में, उनके भाषणों में भारत को साफ-सुथरा करने की बात होती है।

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जमीनी हकीकत भयावह है। पीएम जहां चाहें बोलें लेकिन स्वच्छता अभियान का असर कहीं देखने को नहीं मिल रहा। सरकार ने इसपर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिये। गंगा को स्वच्छ, निर्मल तथा अविरल बनाने के लिए प्रयासों की खबरें हम आयेदिन सुनते रहते हैं। वास्तविकता यह है कि बातें होती रहीं, काम करने की जहमत किसी ने नहीं उठायी।

तिगरीधाम और अन्य जगहों पर मेला अगले साल भी लगेगा। भारी संख्या में लोग शिरकत भी करेंगे, लेकिन जब मेला उजड़ेगा तो वह गंदगी के गहरे निशान छोड़ जायेगा। यह गंदगी जमीन को, पानी को तथा हवा को जहरीली बना रही है। इसका असर तेजी से न हो, मगर धीरे-धीरे हमें नुकसान पहुंचा रही है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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