Header Ads

'चेयरमेन और इ.ओ. बेच रहे पालिका की संपत्ति'

anil-kumar-garg-chairman

नगर पालिका द्वारा कथित तौर पर आसरा योजना के लिए दान दी गयी विवादित भूमि का विवाद और गहरा हो गया है। यह सब इ.ओ., चेयरमेन और एक लिपिक की कार्यप्रणाली से और भी उलझ गया है। चेयरमेन तथा इ.ओ. द्वारा बयान बदलने से यह भी पता नहीं चल पा रहा कि आसरा को आसरा देने में किसकी भूमिका थी? गांव से नगर पंचायत और अब पालिका परिषद बनने तक इस भूमि पर किस-किस का दावा रहा वह भी गौर करने लायक है।

पूर्व चेयरमेन अनिल कुमार गर्ग का कहना है कि विवादित भूमि जिस भूखंड को बताया जा रहा है, वह कुल चार बीघा है जो रिकॉर्ड में गजरौला नगर पंचायत की है। इस समय केवल 770 वर्ग मीटर की बात हो रही है। जिसपर शिवस्वरुप और नगर पालिका दोनों अपना दावा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि बाकी जमीन किसके पास है? क्या चेयरमेन और इ.ओ. ने उसका भी सौदा कर दिया?

अनिल गर्ग ने दावा किया है कि मौजूदा चेयरमेन ने अपने राजनैतिक रसूख और इ.ओ. से सांठगांठ करके करोड़ों की भूमि बेच डाली। उन्होंने गजरौला और धनौरा में बड़ी-बड़ी कोठियां बना लीं। कई प्लॉट खरीद लिए।

पूर्व चेयरमेन ने सभासदों को भी लपेटे में लिया और कहा कि एक-दो को छोड़कर कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं।

गर्ग ने भूमि विवाद पर बुलाई बैठक में कहा कि दलितों का प्रतिनिधि ही दलितों का शोषण करने पर तुला है।

गर्ग ने यह भी कहा कि नगर पंचायत की भूमि किसी को दान नहीं दी जा सकती। जिस एनजीओ को आसरा बनाने की बात की जा रही है। गर्ग ने उसकी कार्यप्रणाली की भी जांच की मांग की है।

चेयरमेन हरपाल सिंह को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर पूर्व चेयरमेन ने कहा कि पहले वे कह रहे थे, कोई प्रस्ताव नहीं हुआ, अब कह रहे हैं कि प्रस्ताव हुआ था, उनके याद नहीं रहा था। अब उसे रद्द कर दिया गया है। इसका क्या मतलब है?

सम्बंधित ख़बरें : 
आसरा विवाद बना स्थानीय राजनीति का आसरा
इ.ओ. ने बोर्ड की सहमति के बिना भूखंड आवंटित कर दिया
कुछ तो है, जो गजरौला नहीं छोड़ना चाहते कामिल
मुन्ना आकिल का चुनाव खर्च भी पाशा ही उठाते हैं

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

गजरौला टाइम्स के ताज़ा अपडेट प्राप्त करने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें.